काठमांडू: नेपाल में सरकार के भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों में हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी फैलने के बाद नेपाली सेना सड़कों पर तैनात कर दी गई है। प्रदर्शनों को रोकने के लिए देशभर में राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध और कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस बीच, आंदोलनकारी अंतरिम सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं।
जेन-जी (Gen Z) नेताओं ने अंतरिम सरकार के नेतृत्व के लिए नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नाम प्रस्तावित किया है। काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह बालेन ने भी इसका समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि पहले संसद को भंग किया जाना चाहिए और फिर अंतरिम सरकार का गठन किया जाए। कई जेन-जी समर्थक एनजीओ भी इसी विचार के पक्ष में हैं।
नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल, नेपाली सेना और जेन-जी युवाओं के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है। सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने का औपचारिक समर्थन मिल सकता है। कार्की की टीम और सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल समेत अन्य अधिकारियों के बीच चर्चा जारी है, जो शीतल निवास स्थित राष्ट्रपति कार्यालय तक बढ़ सकती है।
नेपाल में अब तक की घटनाओं का सिंहावलोकन
जेन-जी के नेतृत्व में दो दिन चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों में अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में कई जानें गई हैं। संसद भवन के सामने विरोध के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 19 लोग मारे गए। काठमांडू के कोटेश्वर इलाके में भीड़ के हमले में तीन पुलिसकर्मी मारे गए। कालीमाटी थाने में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के झड़प में तीन प्रदर्शनकारी मारे गए। गृह मंत्रालय के अनुसार कुल 633 लोग घायल हुए। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी तथा विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा भी घायल हुए। नेपाल की सेना ने देशव्यापी कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लगाकर हिंसा को रोकने की कोशिश की। ये कदम प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के एक दिन बाद उठाए गए। नेपाल की जेलों में भी झड़पें हुईं। कम से कम तीन कैदियों की मौत हुई और 15,000 से अधिक कैदी फरार हो गए। अब तक 60 कैदियों को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने पकड़कर स्थानीय पुलिस को सौंपा है।
अंतरिम सरकार की तैयारी और सुशीला कार्की का प्रस्ताव
जेन-जी नेताओं ने सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वसम्मति से चुना है। सेना मुख्यालय में जेन-जी और अफसरों के बीच बातचीत का दौर जारी है। पिछले दिन भी नौ घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। हालांकि, जेन-जी के कुछ समूहों ने कार्की के नाम का विरोध किया और कुलमान घिसिंग को प्रस्तावित किया। इस कारण सेना मुख्यालय के बाहर जेन-जी समूहों के बीच झड़प भी हुई। काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर जिलों में निषेधाज्ञा और कर्फ्यू को अगले दिन सुबह 6 बजे तक बढ़ा दिया गया है। आवश्यक सेवा वाले वाहन और संस्थान काम कर सकते हैं, लेकिन नागरिकों को छोटे समूहों में कार्य करने की सलाह दी गई है।
जेन-जी का बयान
जेन-जी नेता दिवाकर दंगल ने कहा, “हम नेतृत्व संभालने के लिए अभी परिपक्व नहीं हैं। हमें खून-खराबा नहीं चाहिए। हम संविधान को रद्द नहीं करना चाहते, केवल आवश्यक बदलाव करना चाहते हैं। छह महीने के भीतर चुनाव होंगे।” अनिल बनिया ने कहा कि आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन सर्वेक्षण में 2500 से अधिक वोटों के आधार पर सुशीला कार्की को समर्थन मिला। जुनल गदल ने कहा कि देश के संरक्षक के रूप में कार्की सबसे उपयुक्त विकल्प हैं।
बालेंद्र शाह का दृष्टिकोण
काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह ने ट्वीट कर जेन-जी और नागरिकों से धैर्य रखने की अपील की। उन्होंने लिखा कि देश अब अंतरिम सरकार की ओर बढ़ रहा है, जो नए चुनाव कराएगी। शाह ने सुशीला कार्की के नेतृत्व का पूर्ण समर्थन किया और कहा कि राष्ट्रपति को जेन-जी की क्रांति की रक्षा के लिए अंतरिम सरकार का गठन करना चाहिए। बालेंद्र शाह पेशे से सिविल इंजीनियर और रैपर हैं। उन्होंने 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू मेयर चुनाव जीतकर इतिहास रचा। उनकी लोकप्रियता खासकर युवाओं में अधिक है। शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों को आंदोलन का दुरुपयोग न करने की सलाह दी।
सुशीला कार्की का परिचय
सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को विराटनगर में हुआ। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन और नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें चुनावी विवाद भी शामिल थे। कार्की ने युवाओं के प्रदर्शन का समर्थन किया और सरकार की कार्रवाई को ‘हत्या’ करार दिया। उन्होंने हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से 2500 से अधिक युवा समर्थकों के वोट मिलने के बाद अंतरिम सरकार संभालने के लिए सहमति दी।