आर्थिक समीक्षा 2025-26: उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में बढ़ोतरी, प्राथमिक से माध्यमिक शिक्षा में भी बढ़ा नामांकन

Vin News Network
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक समीक्षा 2025-26 में शिक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए शिक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में देश में स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों स्तरों पर उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। समीक्षा के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन कर रहा है, जहां नामांकन, संस्थानों की संख्या और शैक्षणिक अवसंरचना में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

स्कूली शिक्षा प्रणाली का विस्तार
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में वर्तमान में 14.71 लाख स्कूलों के माध्यम से 24.69 करोड़ विद्यार्थियों को शिक्षा दी जा रही है। इस प्रणाली को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत वर्ष 2030 तक प्री-प्राइमरी से माध्यमिक स्तर तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप सभी स्कूल स्तरों पर स्थिर प्रगति देखी गई है।

जीईआर में सुधार
समीक्षा के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर जीईआर 90.9 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक स्तर पर 90.3 प्रतिशत, माध्यमिक स्तर पर 78.7 प्रतिशत और उच्च माध्यमिक स्तर पर 58.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि साक्षरता दर में सुधार, स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ता नामांकन और व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार को शिक्षा क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया है।

उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में वृद्धि
निर्मला सीतारमण ने बताया कि 2014-15 में उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) की संख्या 51,534 थी, जो जून 2025 तक बढ़कर 70,018 हो गई है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्या में वृद्धि के चलते यह विस्तार संभव हुआ है। इसके साथ ही प्रीमियर उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में भी 2014-15 से 2024-25 के बीच उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, उच्च शिक्षा में छात्रों का नामांकन 2021-22 में 4.33 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.46 करोड़ हो गया है।

आईआईटी, आईआईएम और एम्स का विस्तार
समीक्षा में कहा गया है कि देश में अब 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा, जंजीबार और अबूधाबी में आईआईटी के दो अंतरराष्ट्रीय परिसर भी शुरू किए गए हैं।
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के दायरे में 2,660 संस्थानों को शामिल किया गया है, जिसके तहत 4.60 करोड़ से अधिक पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं।

उच्च शिक्षा में लचीलापन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत जीईआर के एनईपी लक्ष्य को हासिल करने के लिए 153 विश्वविद्यालयों में प्रवेश और निकास की लचीली व्यवस्था तथा वर्ष में दो बार प्रवेश की सुविधा दी गई है।
भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ ट्विनिंग व्यवस्था के तहत संयुक्त और ड्यूल डिग्री कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं। समीक्षा में 15 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के भारत में परिसर स्थापित करने की संभावना भी जताई गई है।

कौशल शिक्षा और रोजगार योग्यता
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि रोजगार दक्षता बढ़ाने के लिए माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थित कौशल निर्माण की सुविधा दी जा रही है। हालांकि, पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार, 14-18 वर्ष आयु वर्ग के केवल 0.97 प्रतिशत युवाओं को ही संस्थागत प्रशिक्षण मिला है, जबकि लगभग 92 प्रतिशत युवाओं को कोई औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हुआ है।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस अंतर को पाटना भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए आवश्यक है। विद्यालयों में कौशल शिक्षा से युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।

सरकारी योजनाओं की भूमिका
समीक्षा में बताया गया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं से जीईआर में सुधार हुआ है। इनमें 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,076 पीएमश्री स्कूलों की स्थापना, 2.99 लाख से अधिक स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, जादुई पिटारा, ई-जादुई पिटारा, किताब एक–पढ़े अनेक और भारतीय भाषा पुस्तक योजना जैसी पहलों से बच्चों को स्थानीय भाषाओं में शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

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