जापान में 8 फरवरी को होने वाले स्नैप आम चुनाव से पहले बुधवार को अर्ली वोटिंग (पूर्व मतदान) की प्रक्रिया शुरू हो गई। स्थानीय मीडिया और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह सुविधा न केवल जापान के भीतर बल्कि दुनिया भर में स्थित जापानी राजनयिक मिशनों और तय मतदान केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई है। चुनावी प्रक्रिया की इस शुरुआती कड़ी के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
जापानी सरकार के अनुसार, विदेशों में रहने वाले जापानी नागरिकों के लिए 233 स्थानों पर मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें दूतावास और वाणिज्य दूतावास शामिल हैं। करीब 1.03 लाख पंजीकृत मतदाता, जो विदेशों में निवास कर रहे हैं, इन केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।

जापान के भीतर भी अर्ली वोटिंग की सुविधा
जापान के अंदर रहने वाले मतदाताओं के लिए भी अर्ली वोटिंग की व्यवस्था की गई है। क्योदो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, जो मतदाता चुनाव के दिन मतदान करने में असमर्थ हैं, वे निर्धारित स्थानों पर पहले ही वोट डाल सकते हैं। यह व्यवस्था बुजुर्गों, कामकाजी लोगों और उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनके लिए चुनाव के दिन मतदान केंद्र तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
पिछले वर्ष 2024 में हुए प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के चुनाव में अर्ली वोटिंग करने वाले मतदाताओं की संख्या लगभग 2.095 करोड़ रही थी। यह आंकड़ा जापान में पूर्व मतदान की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
संसद भंग होने के बाद स्नैप चुनाव
प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने शुक्रवार को संसद के निचले सदन को भंग कर दिया था, जिसके बाद इस स्नैप चुनाव की घोषणा हुई। क्योदो न्यूज के अनुसार, यह पिछले 60 वर्षों में पहली बार है जब नियमित सत्र की शुरुआत में निचले सदन को भंग किया गया है। इस फैसले ने जापान की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
यह चुनाव प्रधानमंत्री ताकाइची के 21 अक्टूबर को पदभार संभालने के बाद पहला आम चुनाव है। उन्होंने यह जिम्मेदारी उस समय संभाली थी, जब सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) और कोमेतो के बीच 26 साल पुराना गठबंधन समाप्त हो गया था। इसके बाद एलडीपी ने जापान इनोवेशन पार्टी के साथ नया गठबंधन बनाया।
465 सीटों के लिए कड़ा मुकाबला
इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की कुल 465 सीटों के लिए 1,270 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। सरकार बनाने और प्रधानमंत्री चुनने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 233 सीटें जीतनी होंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, गठबंधन की राजनीति और बदले हुए समीकरणों के कारण इस बार का चुनाव खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपक्ष का पुनर्गठन
चुनाव से पहले जापान के विपक्षी दलों ने भी खुद को नए सिरे से संगठित किया है। कंस्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी और कोमेतो ने मिलकर सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस का गठन किया है। यह गठबंधन अब सत्तारूढ़ दलों के खिलाफ सबसे बड़ा चुनौतीकर्ता माना जा रहा है।
विपक्षी दलों का कहना है कि वे मतदाताओं के सामने आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखेंगे।
चुनावी प्रणाली का ढांचा
जापान की चुनावी प्रणाली के तहत मतदाता दो वोट डालते हैं। पहला वोट अपने सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए होता है और दूसरा वोट आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत किसी राजनीतिक दल के लिए दिया जाता है।
देशभर में 289 निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे चुनाव होते हैं, जबकि शेष 176 सीटें 11 आनुपातिक प्रतिनिधित्व ब्लॉकों के माध्यम से आवंटित की जाती हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य संसद में विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं को प्रतिनिधित्व देना है।
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सभी दलों ने अपने प्रचार अभियान तेज कर दिए हैं। अर्ली वोटिंग की शुरुआत के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार के चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।