तकनीकी खराबी के कारण लौटा ट्रंप का विमान, वैकल्पिक एयरक्राफ्ट से पहुंचे दावोस; विश्व आर्थिक मंच में वैश्विक तनावों की गूंज

Vin News Network
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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप दावोस सम्मेलन में भाषण देते हुए, जहां वैश्विक नेताओं और उद्योग प्रमुखों की बड़ी संख्या मौजूद थी।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विशेष विमान एयर फोर्स वन मंगलवार को स्विट्ज़रलैंड के लिए उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद ही वॉशिंगटन डीसी के जॉइंट बेस एंड्रयूज़ लौट आया। व्हाइट हाउस ने बताया कि विमान में एक “मामूली तकनीकी समस्या” सामने आई थी, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से उसे वापस बुलाया गया। हालांकि, इस घटनाक्रम से ट्रंप की यात्रा प्रभावित नहीं हुई। उन्होंने तुरंत अमेरिकी वायुसेना के एक अन्य विमान, एयर फोर्स C-32, में सवार होकर अपनी यात्रा जारी रखी और विश्व आर्थिक मंच (WEF) में भाग लेने के लिए दावोस के लिए रवाना हो गए।

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दुनिया भर में राजनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। युद्ध, व्यापार तनाव, जलवायु संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती जैसे मुद्दों के बीच इस वर्ष का विश्व आर्थिक मंच खास महत्व रखता है। ट्रंप की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को और अधिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।

ट्रंप की दावोस यात्रा ऐसे माहौल में हो रही है जब यूरोप के साथ अमेरिका के संबंध कई मुद्दों पर उलझे हुए हैं। इनमें ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की टिप्पणियां और उसके बाद यूरोपीय देशों पर संभावित टैरिफ लगाने की धमकियां प्रमुख हैं। इन बयानों ने ट्रांसअटलांटिक रिश्तों में नई दरारें पैदा कर दी हैं।

विश्व आर्थिक मंच क्या है?

विश्व आर्थिक मंच, जिसे WEF के नाम से जाना जाता है, एक अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक और सम्मेलन आयोजक संस्था है, जिसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में स्थित है। इसकी स्थापना वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन समय के साथ यह मंच केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा।

आज WEF एक ऐसा वैश्विक मंच बन चुका है जहां आर्थिक असमानता, जलवायु परिवर्तन, उभरती तकनीकें, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भू-राजनीतिक संघर्ष जैसे व्यापक मुद्दों पर चर्चा होती है। यहां होने वाली बैठकों और चर्चाओं का असर अक्सर वैश्विक नीतियों और आर्थिक फैसलों पर भी देखा जाता है।

WEF का वार्षिक शिखर सम्मेलन हर साल जनवरी में स्विट्ज़रलैंड के पहाड़ी शहर दावोस में आयोजित होता है। दावोस एक प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट है और यहां की आबादी लगभग 10,000 के आसपास है। वर्ष 1971 से यह शहर लगातार विश्व आर्थिक मंच की मेज़बानी करता आ रहा है और हर साल जनवरी में यह छोटा-सा शहर वैश्विक सत्ता, नीति और व्यापार का केंद्र बन जाता है।

दावोस सम्मेलन में कौन-कौन शामिल हो रहा है?

इस वर्ष के सम्मेलन में रिकॉर्ड संख्या में वैश्विक नेता और नीति-निर्माता शामिल हो रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, लगभग 400 वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियां इस सम्मेलन में भाग ले रही हैं। इनमें 60 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल हैं। इसके अलावा, दुनिया की प्रमुख कंपनियों के करीब 850 चेयरपर्सन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी दावोस पहुंचे हैं।

सम्मेलन के कार्यक्रम में सबसे प्रमुख नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का है, जो बुधवार को मंच से अपना संबोधन देने वाले हैं। उनके भाषण को लेकर खास उत्सुकता है, क्योंकि उनके विचार अक्सर पारंपरिक कूटनीतिक भाषा से अलग और सीधे टकराव वाले होते हैं।

ट्रंप के साथ अमेरिकी प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी दावोस में मौजूद हैं। इनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। इन सभी की भागीदारी से संकेत मिलता है कि अमेरिका इस मंच को कूटनीतिक और रणनीतिक संदेश देने के लिए गंभीरता से ले रहा है।

दावोस में शामिल अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिसेकेदी, चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की शामिल हैं।

आयोजकों के मुताबिक, इस सम्मेलन में 55 अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्री, 33 विदेश मंत्री, 34 व्यापार, वाणिज्य और उद्योग मंत्री और 11 केंद्रीय बैंक गवर्नर भी भाग ले रहे हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि दावोस सिर्फ एक चर्चा मंच नहीं, बल्कि वैश्विक निर्णय-निर्माण का अहम केंद्र है।

गाज़ा पर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक की कोशिश

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप दावोस में अपने तथाकथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की एक बैठक आयोजित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें गाज़ा संकट पर चर्चा हो सकती है। ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, ट्रंप इस मंच का इस्तेमाल मध्य पूर्व से जुड़े मुद्दों पर अपनी कूटनीतिक पहल को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं।

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप बनाम यूरोप

दावोस रवाना होने से एक दिन पहले ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं पर कटाक्ष किया था। उन्होंने स्वायत्त डेनिश क्षेत्र ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर बयान देते हुए संकेत दिया कि यह क्षेत्र अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए बेहद अहम है।

दावोस में मौजूद यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूरोप को “धौंस जमाने वालों” के सामने मजबूती से खड़ा होना चाहिए। वहीं, यूरोपीय संघ ने साफ कहा है कि वह किसी भी दबाव का “बिना झुके और बिना डरे” जवाब देगा।

ट्रंप का तर्क है कि खनिज संसाधनों से भरपूर ग्रीनलैंड अमेरिका और नाटो की सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में। हालांकि, यूरोपीय संघ और डेनमार्क इस मुद्दे पर ट्रंप के नजरिए से सहमत नहीं हैं।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड और व्यापार शुल्क जैसे मुद्दों पर ट्रंप का रुख अमेरिका और यूरोपीय संघ के रिश्तों को “नकारात्मक दिशा में ले जा सकता है।”

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को दावोस में खास समर्थन मिला। ट्रंप द्वारा कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाए जाने की टिप्पणी के बाद कार्नी ने वॉशिंगटन पर निर्भरता कम करने की नीति अपनाई। दावोस में इस रुख के लिए उन्हें खड़े होकर तालियां बजाकर समर्थन दिया गया।

इस वर्ष का विश्व आर्थिक मंच ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। ट्रंप की मौजूदगी, यूरोप के साथ बढ़ता तनाव और बड़े वैश्विक मुद्दों पर होने वाली चर्चाएं इस बार के दावोस सम्मेलन को पहले से कहीं अधिक निर्णायक और संवेदनशील बना रही हैं।

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