बांग्लादेश में जारी राजनीतिक और सामाजिक अशांति अब देश की सीमाओं से बाहर असर दिखाने लगी है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि ढाका ने भारत में अपनी राजनयिक गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है, जबकि भारत ने अल्पसंख्यकों पर हमलों और राजनयिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस पूरे घटनाक्रम की गूंज कोलकाता की सड़कों तक सुनाई दी, जहां बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।
इस संकट की जड़ में हाल की कुछ घटनाएं हैं—एक हिंदू युवक की हत्या, एक कट्टर युवा नेता की मौत और उसके बाद भड़की हिंसक राजनीति। मीडिया संस्थानों पर हमले हुए, पत्रकारों को खतरे का सामना करना पड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों में डर गहराता चला गया। जो राजनीतिक समूह कभी अंतरिम सरकार के समर्थक थे, अब वही उसके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल रहे हैं।
नीचे बांग्लादेश में जारी अशांति से जुड़े 10 ताज़ा और अहम घटनाक्रम दिए गए हैं:
- भारत में वीज़ा सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित
बांग्लादेश ने नई दिल्ली स्थित अपने उच्चायोग और त्रिपुरा व सिलीगुड़ी में अपने मिशनों पर वीज़ा सेवाएं रोक दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला राजनयिक परिसरों के पास हुए प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा कारणों से लिया गया। इसके जवाब में भारत ने बांग्लादेश के दूत को तलब कर अल्पसंख्यकों पर हमलों और राजनयिक मिशनों को मिल रही धमकियों पर कड़ी आपत्ति जताई।
- कोलकाता में सड़कों पर उतरा जनाक्रोश
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की हत्या की निंदा की और बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। कुछ संगठनों ने आगे और आंदोलन व सीमा पर प्रदर्शन की चेतावनी भी दी।
- दीपु चंद्र दास की हत्या ने झकझोरा
मयमनसिंह में परिधान उद्योग से जुड़े हिंदू श्रमिक दीपु चंद्र दास की हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन के अनुसार यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि कई घंटों तक चली घटनाओं की श्रृंखला का नतीजा थी, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
- कथित ईशनिंदा का आरोप बेबुनियाद
जांच में सामने आया है कि दीपु दास द्वारा किसी भी तरह की ईशनिंदा से जुड़ी टिप्पणी या सोशल मीडिया पोस्ट का कोई सबूत नहीं मिला। अधिकारियों का मानना है कि यह आरोप अस्पष्ट और अप्रमाणित था, जिसे संभवतः निजी या कार्यस्थल विवाद को हवा देने के लिए इस्तेमाल किया गया।
- फैक्ट्री प्रबंधन पर भी कार्रवाई
अब तक कम से कम 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें फैक्ट्री के सुपरवाइज़र और सहकर्मी शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, पीड़ित को पुलिस के हवाले करने के बजाय नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
- उस्मान हादी की मौत से भड़की देशव्यापी उथल-पुथल
पिछले साल के जुलाई आंदोलन से उभरे युवा नेता उस्मान हादी की मौत ने पूरे बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शनों को तेज कर दिया। ढाका में गोली लगने के बाद उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां कुछ दिनों बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद वे कट्टरपंथी समूहों के लिए एक प्रतीक बन गए।
- अंतरिम सरकार को चेतावनी
हादी के सहयोगियों द्वारा संचालित मंच ‘इंक़िलाब मंच’ ने अंतरिम सरकार को अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने त्वरित न्यायाधिकरण, निष्पक्ष जांच और यहां तक कि विदेशी एजेंसियों की मदद से जांच की मांग करते हुए सरकार को गिराने की चेतावनी दी है।
- मीडिया संस्थानों पर हमले
ढाका में हिंसक भीड़ ने ‘द डेली स्टार’ और ‘प्रोथोम आलो’ जैसे प्रमुख समाचार पत्रों के दफ्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी की। कई पत्रकार घंटों तक इमारतों में फंसे रहे। संपादकों का कहना है कि यह हमला रिपोर्टिंग के विरोध में नहीं, बल्कि प्रेस की आवाज दबाने के लिए था।
- अल्पसंख्यकों में बढ़ता डर
हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने ढाका समेत कई शहरों में प्रदर्शन कर सुरक्षा की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पूर्व सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यक खुद को पहले से ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
- चुनाव का वादा, लेकिन सवाल बरकरार
मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने दोहराया है कि आम चुनाव 12 फरवरी को कराए जाएंगे। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि मौजूदा हिंसा, हत्याओं और राजनीतिक अस्थिरता के बीच स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराना बड़ी चुनौती होगी।
बांग्लादेश की यह अशांति अब सिर्फ आंतरिक संकट नहीं रही। इसका असर भारत-बांग्लादेश संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और सीमा पार जनभावनाओं पर साफ़ दिख रहा है। आने वाले हफ्ते तय करेंगे कि यह संकट बातचीत से सुलझता है या और गहराता है।