जम्मू। 26 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश ने शहर को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। शहर के कई इलाकों में पानी भरने से छह हजार से ज्यादा घरों में जलभराव हुआ। लगभग एक हजार घरों में मलबा भर गया जबकि करीब 150 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिला प्रशासन की टीमें लगातार घर-घर जाकर नुकसान का आकलन कर रही हैं।
चार दिन बाद भी मलबा साफ नहीं, गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित
बारिश का असर इतना गहरा रहा कि चौथे दिन भी कई घरों में मलबा जमा है। कई जगह दीवारें गिर गईं और घरों में दरारें आ गईं। पानी घुसने से घरों में रखे टीवी, फ्रिज, लैपटॉप, बेड, अलमारी जैसे उपकरण खराब हो गए। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब परिवारों को झेलनी पड़ी है, क्योंकि उनका घरेलू सामान पूरी तरह से नष्ट हो गया है।
प्रभावित इलाके
मुठ्ठी, राजेंद्र नगर, गुज्जर नगर, पीरखो, जानीपुर, तालाब तिल्लो, कैलाश नगर, सैनिक कालोनी, गंग्याल, अपना बिहार, जीवन नगर, संजय नगर और कुंजवानी सहित कई इलाकों में सबसे ज्यादा तबाही दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में घर, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहन भारी नुकसान की चपेट में आए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक सामान का नुकसान
बारिश का सबसे ज्यादा असर इलेक्ट्रॉनिक सामान पर पड़ा है। टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, फ्रिज और इंडक्शन जैसे उपकरण पानी में डूबने से खराब हो गए। तालाब तिल्लो में बिजली उपकरणों की मरम्मत करने वाले दुकानदार श्याम सिंह ने बताया कि लोग बड़ी संख्या में अपने उपकरण ठीक कराने आ रहे हैं। कई उपकरणों में करंट आने जैसी समस्या सामने आ रही है।
फर्नीचर बर्बाद
पानी घुसने से घरों में लगे प्लाईवुड के फर्नीचर की हालत भी खराब हो गई है। बेड और अलमारी पानी सोखने से उखड़ गए हैं। फर्नीचर कारोबारी कुशाल सिंह ने बताया कि बारिश ने लाखों रुपये का नुकसान कर दिया है। हर साल तीन से दस लाख रुपये तक का फर्नीचर बिकता है, लेकिन इस बारिश से पूरे मार्केट में नई डिमांड खड़ी हो गई है।
वाहन भी डूबे
सड़क किनारे और समतल जगहों में खड़े वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है। शहर में करीब 200 वाहनों में तकनीकी खराबी आई है जबकि 50 से ज्यादा गाड़ियां मलबा और पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई जगहों पर पानी इतना भर गया कि वाहन पूरी तरह डूबे रहे।
सबसे ज्यादा प्रभावित वार्ड
वार्ड नंबर 32, 61 और 72 में पानी का स्तर सबसे ज्यादा रहा। निचले इलाकों में खेतों से पानी सीधे घरों में घुस गया। लोगों को अपना सामान तक बचाने का मौका नहीं मिल पाया। अब इन इलाकों में लोग मलबा हटाने और मरम्मत में जुटे हुए हैं।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
स्थानीय पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम को पहले से आपदा प्रबंधन के लिए चेतावनी दी गई थी, लेकिन समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। वार्ड नंबर 74 के पूर्व पार्षद शौकत अली और प्रो. युद्धवीर सेठी समेत कई नेताओं ने कहा कि नालियों की सफाई और गहराई नहीं की गई, जिस कारण पानी भर गया।
करोड़ों का नुकसान, राहत कार्य जारी
बारिश से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भी जनता को राहत नहीं दे पाए। प्रशासन का कहना है कि राहत और बहाली का काम शुरू हो चुका है। नालियों और नालों को खोलकर जलभराव हटाने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन का बयान:
“बारिश के बाद राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। ज्यादातर प्रभावित इलाकों में समस्याओं का समाधान कर दिया गया है। शेष क्षेत्रों में भी जल्द काम पूरा किया जाएगा।”