नई दिल्ली। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद भारतीय प्रवासियों के लिए हालात और कठिन हो गए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से जुलाई 2025 के बीच अमेरिका से 1703 भारतीयों को जबरन देश निकाला (deported) किया गया, जो कि औसतन हर दिन 8 लोगों के निर्वासन के बराबर है। वहीं जो बाइडन के पूरे कार्यकाल यानी 2020 से 2024 के बीच यह औसत करीब 3 प्रतिदिन था। तुलना करें तो ट्रंप प्रशासन में यह आंकड़ा दोगुना हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रफ्तार आने वाले समय में और तेज़ हो सकती है।
5.5 साल में 7244 भारतीयों को भेजा गया वापस
अमेरिकी आव्रजन एजेंसियों द्वारा साझा किए गए डेटा के अनुसार, 2020 से जुलाई 2025 तक कुल 7244 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित किया गया। इनमें से केवल 1703 निर्वासन जनवरी 2025 के बाद, यानी ट्रंप के कार्यभार संभालने के 6 महीनों के भीतर हुए। यह स्थिति भारत और अमेरिका के बीच प्रवासी सहयोग नीति पर भी असर डाल सकती है, खासकर उन छात्रों और अस्थायी वीजा धारकों के लिए, जो भविष्य में अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं।
बदलते रुख का असर छात्रों और कामगारों पर
जानकारों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां विशेष रूप से अवैध अप्रवासियों, वीजा ओवरस्टे, और डिटेंशन फैसिलिटीज़ से जुड़े लोगों पर ज्यादा सख्त हैं। अब भारत से अमेरिका जाने वाले H-1B वीजा धारकों, OPT (Optional Practical Training) पर काम कर रहे छात्रों और टूरिस्ट वीजा वालों की जांच और सख्त हो गई है। यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) ने साफ किया है कि ट्रंप के निर्देशों के बाद अवैध निवासियों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निर्वासन भी शामिल है।
किन कारणों से हो रहे हैं निर्वासन?
इन निर्वासनों के पीछे कई कारण सामने आए हैं, जैसे:
- वीजा की अवधि पूरी होने के बाद भी अमेरिका में रहना
- फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर प्रवेश
- अपराध में लिप्त पाया जाना
- अस्थायी संरक्षण स्थिति (TPS) का खत्म होना
- ट्रंप प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ये निर्वासन न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक दबाव का नतीजा भी हैं।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, भारत ने अमेरिका के समक्ष राजनयिक स्तर पर चिंता जाहिर की है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा: “हम उम्मीद करते हैं कि भारत के नागरिकों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। अनियमितताओं को सुलझाने के लिए संवाद ज़रूरी है, न कि निर्वासन।”
ट्रंप की नीतियां कितनी कठोर?
डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से “America First” और “Secure Borders” जैसे नारों को ज़ोर-शोर से लागू किया है। उनकी प्रवासन नीति में अब सख्त सीमाएं, तेजी से निर्वासन और सख्त वीजा जांच की नीति अपनाई जा रही है। विशेष रूप से एशियाई मूल के प्रवासियों, खासकर भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों पर असर पड़ा है।