वाशिंगटन। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने टैरिफ को लेकर ट्रंप प्रशासन से जवाब मांगा है और 14 अक्टूबर तक का समय दिया है। अगर सुप्रीम कोर्ट भी इस फैसले को बरकरार रखती है, तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील्स पर गहरा असर पड़ सकता है।
अमेरिकी अदालत ने टैरिफ को बताया सवालों के घेरे में
डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालने के बाद विदेशी वस्तुओं पर टैरिफ का नया कानून लागू किया था। 2 अप्रैल से लागू इस टैरिफ के जरिए अमेरिका ने अब तक लगभग 159 बिलियन डॉलर (14 लाख करोड़ रुपये) की कमाई की है। लेकिन अब अदालत ने इसे कानून के खिलाफ बताते हुए 14 अक्टूबर तक का समय दिया है। इस दौरान ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।
अगर टैरिफ हटेगा तो अमेरिका को होगा बड़ा घाटा
अमेरिका ने टैरिफ के जरिए न सिर्फ विदेशी कंपनियों से मोटी कमाई की है, बल्कि घरेलू उद्योगों को भी इसका फायदा पहुंचाने का दावा किया था। लेकिन अगर यह टैरिफ हटाना पड़ा, तो अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान होगा। सबसे बड़ा संकट यह होगा कि उसे अरबों डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं। इससे न सिर्फ अमेरिकी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, बल्कि महंगाई और बेरोजगारी जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं।
ट्रेड डील्स पर भी गिरेगा असर
ट्रंप प्रशासन कई देशों के साथ नई ट्रेड डील्स पर बातचीत कर रहा है। टैरिफ की वजह से अब तक अमेरिका का पलड़ा भारी रहा, लेकिन अगर कोर्ट ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दे दिया, तो इन डील्स पर अमेरिका की स्थिति कमजोर हो सकती है। चीन, भारत, यूरोपीय यूनियन जैसे देशों के साथ हुए समझौते भी प्रभावित होंगे।
ट्रंप का बयान: “टैरिफ हटे तो बर्बाद हो जाएगा अमेरिका”
ट्रंप ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर टैरिफ खत्म किया गया तो यह अमेरिका के लिए “विनाशकारी” साबित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह फैसला विदेशी कंपनियों को फायदा पहुँचाएगा और अमेरिकी उद्योग धंधे बर्बाद हो जाएंगे।
दुनिया पर असर
टैरिफ हटने का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा। कई देशों के निर्यातकों को राहत मिलेगी। वैश्विक व्यापार सुगम होगा। लेकिन अमेरिकी कंपनियाँ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकती हैं।
अदालत का आदेश और अगला कदम
अमेरिकी संघीय अदालत ने कहा है कि ट्रंप द्वारा लागू किया गया टैरिफ कानूनी दायरे में नहीं आता। अब ट्रंप प्रशासन के पास केवल दो रास्ते हैं – सुप्रीम कोर्ट में अपील करना। या फिर टैरिफ को हटाना और अरबों डॉलर की वापसी करना।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर टैरिफ हटा दिया जाता है तो अल्पकाल में वैश्विक व्यापार को गति मिलेगी, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी के हालात बन सकते हैं। वहीं, विदेशी निवेशक इसे अमेरिका की कमजोरी मान सकते हैं।
भारत और अन्य देशों के लिए क्या मतलब?
भारत जैसे देशों को टैरिफ हटने से सीधा फायदा मिलेगा। भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश आसान होगा। आईटी, टेक्सटाइल, फार्मा और स्टील सेक्टर में नई संभावनाएँ बनेंगी। वहीं, चीन और यूरोपीय यूनियन भी इस फैसले से राहत महसूस करेंगे।