देश में नकली और जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सोमवार को मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी करते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने इस मामले को बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार से जुड़ा गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन माना है।
नकली कफ सिरप से मासूमों की मौत, NHRC ने मांगी रिपोर्ट
NHRC ने कहा है कि उसे एक शिकायत मिली है जिसमें आरोप लगाया गया है कि इन राज्यों के कुछ जिलों में नकली कफ सिरप पीने से 12 बच्चों की मौत हुई है। आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) को भी इस मामले में रिपोर्ट देने के लिए कहा है। आयोग ने निर्देश दिया कि सभी राज्य लैब्स अपने-अपने क्षेत्रों से कफ सिरप के सैंपल इकट्ठा करें और जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द केंद्र को सौंपें।
तमिलनाडु की फैक्ट्री से निकला जहरीला सिरप
जांच में सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में आया है ‘कोल्ड्रिफ (Coldrif)’ नाम का सिरप, जो तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले की श्रीसन फार्मास्यूटिकल यूनिट में बनाया जा रहा था। सरकारी जांच में पाया गया कि इस सिरप में 48.6% डाइथाइलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol – DEG) मिला हुआ था – जो एक जहरीला केमिकल है और किडनी फेल्योर का प्रमुख कारण बन सकता है।
चेन्नई की सरकारी ड्रग्स टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया कि कोल्ड्रिफ सिरप का बैच “Not of Standard Quality” है और मानव उपभोग के लिए खतरनाक है।
मध्य प्रदेश में 11 बच्चों की मौत, छिंदवाड़ा बना हॉटस्पॉट
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में इस जहरीले सिरप से 11 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। पहला मामला 24 अगस्त को सामने आया, जबकि सितंबर के पहले हफ्ते में लगातार मौतें होने लगीं। राज्य के फूड एंड ड्रग कंट्रोलर दिनेश कुमार मौर्य ने बताया कि कोल्ड्रिफ सिरप में DEG की मात्रा तय सीमा से कई गुना अधिक थी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतक बच्चों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सरकार ने राज्यभर में इस दवा की बिक्री और वितरण पर तुरंत रोक लगा दी है।
राजस्थान में एक और कफ सिरप से 3 मौतें
मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में भी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। यहां भरतपुर, सीकर और चूरू जिलों में तीन बच्चों की मौत हुई है। शुरुआती जांच में Dextromethorphan Hydrobromide Syrup IP का नाम सामने आया, जो केसंस फार्मा (Kesons Pharma) कंपनी द्वारा बनाया गया था।
राजस्थान सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए केसंस फार्मा की सभी 19 दवाओं पर रोक लगा दी और राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया। शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने पहले इस कंपनी को क्लीन चिट दी थी।
तीन राज्यों में Coldrif पर बैन
तमिलनाडु की फैक्ट्री में बने इस जहरीले सिरप को अब मध्य प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में पूरी तरह बैन कर दिया गया है।
CDSCO ने तमिलनाडु फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को निर्देश दिया है कि कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
राज्य के अधिकारियों ने फैक्ट्री से स्टॉक जब्त कर लिया है, सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स को नोटिस भेजे गए हैं और मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
NHRC की सख्ती: बच्चों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
NHRC की प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह मामला केवल एक दवा की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने एक विशेष जांच समिति (SIT) बनाने की मांग की है, जो पूरे सिस्टम – उत्पादन, वितरण, नियामक जिम्मेदारी और मुआवजे – की समीक्षा करे। NHRC ने स्पष्ट किया है कि अगर जांच में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों पर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला दर्ज किया जाएगा।
केंद्र सरकार की चेतावनी: दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दें
इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अहम एडवाइजरी जारी की है।
मंत्रालय ने कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी कफ सिरप का सेवन नहीं कराया जाए।
DGHS के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में खांसी की दवाओं का इस्तेमाल भी बहुत सावधानी से और सीमित अवधि के लिए किया जाना चाहिए।
एडवाइजरी में कहा गया है कि बच्चे को दवा देने के बाद उसकी सतर्क निगरानी जरूरी है और कई दवाओं के साथ कफ सिरप का कॉम्बिनेशन से बचा जाए।
तमिलनाडु सरकार का एक्शन प्लान
तमिलनाडु सरकार ने इस हादसे के बाद तुरंत सख्त कदम उठाए हैं –
कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री और वितरण पर रोक
सभी जिलों में स्टॉक फ्रीज करने के आदेश
कंपनी को स्टॉप प्रोडक्शन नोटिस जारी
ओडिशा और पुडुचेरी को भी अलर्ट
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के खिलाफ शो-कॉज नोटिस
राज्य सरकार ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में सभी फार्मा यूनिट्स का विशेष ऑडिट कराएगी, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सख्त निगरानी की जरूरत
यह घटना भारत में फार्मा सेक्टर की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। देश दुनिया के लिए दवाइयों का प्रमुख उत्पादक है, लेकिन अगर निगरानी ढीली रही तो ऐसे हादसे भारत की दवा सुरक्षा की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं। NHRC का दखल इस बात का संकेत है कि अब सरकार को दवा निर्माण और वितरण पर जवाबदेही तय करनी होगी। आने वाले दिनों में इस केस की जांच यह तय करेगी कि गलती उत्पादन स्तर पर थी या निगरानी तंत्र में।