अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों पर चोरी की बढ़ती घटनाएं एक खास पैटर्न की ओर इशारा करती हैं और इसके लिए बीजेपी तथा आरएसएस को जवाब देना चाहिए।
पवन खेड़ा ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि देश के कई धार्मिक स्थलों पर चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो केवल संयोग नहीं बल्कि एक गंभीर सवाल खड़ा करती हैं। उनके मुताबिक बीजेपी और आरएसएस धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और सत्ता हासिल करने के माध्यम के रूप में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी साफ दिखाई देती है।
कांग्रेस नेता ने आरएसएस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन को अपनी वित्तीय व्यवस्था और खातों को सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने पूछा कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो फिर आरएसएस खुद को पूरी तरह जवाबदेह बनाने से क्यों बचता है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति ही ऐसे विवादों को जन्म देती है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस के नेता अयोध्या जाकर राम मंदिर के दर्शन करेंगे, तो उन्होंने कहा कि इससे मौजूदा विवाद का कोई समाधान नहीं निकलने वाला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता पहले भी राम मंदिर जा चुके हैं और कुछ नेताओं ने वहां दान भी दिया है। लेकिन मौजूदा विवाद का संबंध किसी राजनीतिक दल के दर्शन करने या न करने से नहीं, बल्कि मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता से है।
पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि राम मंदिर परियोजना को बीजेपी और आरएसएस ने अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया है। उनके अनुसार यदि इस परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने भी पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि चढ़ावे की राशि की गणना और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय ट्रस्टियों के पास थी।
गोविंद देव गिरि का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ट्रस्ट की अहम बैठक से ठीक पहले सामने आया है। माना जा रहा है कि बैठक में चढ़ावा विवाद, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और भविष्य की व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। एक ओर राज्य सरकार मामले में कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार और ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में ट्रस्ट की बैठक और जांच की प्रगति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।