NCERT की किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर भड़के CJI, जल्द सुनवाई का आश्वासन

Vin News Network
Vin News Network
4 Min Read
न्यायपालिका की छवि पर सवालों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में शामिल “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय को लेकर गंभीर चिंता जताई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी को भी न्यायपालिका की छवि खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस मामले की जल्द सुनवाई की जाएगी। यह मामला तब सामने आया जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे कोर्ट के सामने उठाया।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि देशभर में जज और वकील इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं और न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में वह अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। इस मामले में जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री संविधान की मूल संरचना पर हमला कर सकती है।

एनसीईआरटी की नई कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि भ्रष्टाचार, मामलों का लंबित रहना और जजों की कमी न्याय व्यवस्था की बड़ी समस्याएं हैं। किताब में यह भी कहा गया है कि जज एक आचार संहिता के तहत काम करते हैं, जो उनके व्यवहार को कोर्ट के अंदर और बाहर दोनों जगह नियंत्रित करती है।

“हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” नाम के अध्याय में केवल अदालतों की संरचना ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के सामने आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर भी चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ सकता है, जिससे खासकर गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए न्याय तक पहुंच और मुश्किल हो जाती है।

किताब में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके तहत तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है और जहां भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं, वहां सख्त कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा, न्यायपालिका में शिकायतों के समाधान के लिए एक व्यवस्था भी बताई गई है, जिसे केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (CPGRAMS) के माध्यम से चलाया जाता है।

किताब में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं, हाई कोर्ट में करीब 62.40 लाख और जिला व अधीनस्थ अदालतों में लगभग 4.70 करोड़ मामले अभी भी लंबित हैं। ये आंकड़े न्याय व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को दर्शाते हैं।

इस पुस्तक में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का भी जिक्र किया गया है। उन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि न्यायपालिका के अंदर भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाएं जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि इस भरोसे को दोबारा मजबूत करने का रास्ता पारदर्शी, त्वरित और सख्त कार्रवाई में ही है।

इस पूरे विवाद का केंद्र यह है कि क्या स्कूल की किताबों में इस तरह की संवेदनशील जानकारी को शामिल किया जाना चाहिए या नहीं। जहां एक ओर इसे जागरूकता बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर न्यायपालिका इसे अपनी छवि पर नकारात्मक असर डालने वाला कदम मान रही है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है, जिसमें इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *