शेयर बाजार में बीते कुछ सत्रों से दबाव झेल रहे सिगरेट सेक्टर के शेयरों में अचानक तेज़ उछाल देखने को मिला है। आईटीसी (ITC), गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया और वीएसटी इंडस्ट्रीज़ जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 6% से लेकर 13% तक की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि सिगरेट कंपनियों ने बढ़े हुए टैक्स का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालते हुए उत्पादों की कीमतों में इज़ाफा कर दिया है।
गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और एक ही कारोबारी सत्र में करीब 13% की छलांग लगाकर ₹2,240 के स्तर तक पहुंच गए। वहीं आईटीसी के शेयर लगभग 6% की बढ़त के साथ ₹328 तक चढ़े। वीएसटी इंडस्ट्रीज़ के शेयरों में भी करीब 6% की मजबूती देखने को मिली। निवेशकों का भरोसा लौटने से पूरे एफएमसीजी और तंबाकू सेक्टर में सकारात्मक माहौल बन गया।
बाजार सूत्रों के मुताबिक सिगरेट कंपनियों ने अलग-अलग श्रेणियों में 15% से 30% तक कीमतें बढ़ाई हैं। उदाहरण के तौर पर गॉडफ्रे फिलिप्स की 97 मिमी लंबी सिगरेट का पैक अब ₹300 में बिक रहा है, जो पहले करीब ₹240 में उपलब्ध था। कंपनियों का मानना है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी बढ़े हुए टैक्स की भरपाई के लिए जरूरी थी।
दरअसल सरकार द्वारा लागू किए गए नए टैक्स ढांचे ने सिगरेट उद्योग पर भारी दबाव बनाया था। वर्तमान में सिगरेट पर प्रति 1,000 स्टिक ₹2,050 से ₹8,500 तक एक्साइज ड्यूटी लगती है, इसके अलावा 40% जीएसटी भी लागू होता है। इस टैक्स संरचना के कारण कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका थी, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी।
इस बीच यूनियन बजट में नेशनल कैलैमिटी कंटिंजेंट ड्यूटी (NCCD) को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हुई। बजट में NCCD की वैधानिक दर 25% से बढ़ाकर 60% करने का प्रस्ताव रखा गया, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होना है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल प्रभावी दर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इससे कंपनियों को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि सिगरेट कंपनियों के पास मजबूत ब्रांड और स्थिर उपभोक्ता आधार होने के कारण वे टैक्स बढ़ोतरी का असर काफी हद तक कीमतों के जरिए संतुलित कर सकती हैं। हालांकि कीमतें बढ़ने से मांग पर असर पड़ने और अवैध सिगरेट कारोबार के बढ़ने का खतरा भी बना रहता है, जो सरकार और कंपनियों—दोनों के लिए चिंता का विषय है।
आईटीसी के दिसंबर तिमाही नतीजों ने भी बाजार को कुछ हद तक भरोसा दिया। कंपनी की कुल आय में सालाना आधार पर 6.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सिगरेट से होने वाली आय करीब 8% बढ़ी, हालांकि कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण मार्जिन पर दबाव देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में इनपुट कॉस्ट स्थिर होने पर मार्जिन में सुधार हो सकता है।
कुल मिलाकर, सिगरेट शेयरों में आई तेजी यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल कंपनियों की प्राइसिंग पावर और टैक्स मैनेजमेंट रणनीति पर भरोसा कर रहा है। हालांकि लंबी अवधि में नियामकीय जोखिम और टैक्स नीति से जुड़ी अनिश्चितता इस सेक्टर के लिए चुनौती बनी रह सकती है।