ITC लिमिटेड के शेयर गुरुवार, 1 जनवरी को करीब दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गए। इस गिरावट का मुख्य कारण सरकार द्वारा सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर बढ़ाए गए करों का ऐलान और बाजार में हुई एक बड़ी ब्लॉक डील रहा।
वित्त मंत्रालय ने हाल ही में नोटिफिकेशन जारी किया कि 1 फरवरी, 2026 से सिगरेट, तंबाकू और बीड़ी पर प्रभावी 40% GST लागू होगा। इस नए ढांचे में मानक 28% GST दर के साथ उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और नेशनल कैलेमीटी कंटिंजेंसी ड्यूटी (NCCD) को शामिल किया गया है। अब निवेशक और बाजार विशेषज्ञ यह आंकलन कर रहे हैं कि इस बदलाव के बाद कुल कर बोझ कितना होगा और क्या इस पर कोई अतिरिक्त सेस या ड्यूटी लगेगी।
इसके अलावा, बाजार भावना पर एक बड़ी ब्लॉक डील का भी असर पड़ा। इस सत्र में करीब 4 करोड़ से अधिक ITC शेयरों का कारोबार हुआ, जो कंपनी के कुल शेयरों का लगभग 0.3% था। इस डील का औसत मूल्य लगभग ₹400 प्रति शेयर रहा, जिससे कुल लेनदेन का मूल्य ₹1,614.5 करोड़ तक पहुंच गया। इस बड़ी ब्लॉक डील ने शेयर बाजार में ITC के भाव पर दबाव डाला।
ITC के लिए सिगरेट कारोबार कंपनी की आय का महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। सितंबर तिमाही में यह खंड कुल राजस्व का लगभग 48% हिस्सा रहा। तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, सिगरेट व्यवसाय की आय सालाना आधार पर 6.7% बढ़कर ₹8,722 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि बिक्री की मात्रा 6% बढ़ी। यह बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है, जिन्होंने 5-6% की वृद्धि की भविष्यवाणी की थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट पर बढ़ा कर ITC के मुनाफे पर सीधा असर डाल सकता है, क्योंकि यह उनके मुख्य राजस्व स्रोतों में से एक है। हालांकि, कंपनी के पास अन्य व्यवसाय जैसे FMCG, हॉस्पिटैलिटी और कृषि आधारित उत्पाद भी हैं, लेकिन सिगरेट खंड अब भी उनके कुल लाभ का लगभग आधा योगदान देता है।
वित्त मंत्रालय के इस नए कर ढांचे का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि स्वास्थ्य कारणों से तंबाकू उत्पादों की खपत को नियंत्रित करना भी है। 40% GST में Excise Duty और NCCD का समावेश सरकार की नीति के अनुरूप है, जो कर संरचना को सरल और पारदर्शी बनाने का प्रयास करती है। बाजार में निवेशक और विश्लेषक इस बदलाव का ध्यान रखते हुए ITC के शेयर की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
ITC की शेयर कीमत में यह गिरावट केवल कर वृद्धि से नहीं, बल्कि ब्लॉक डील के कारण भी हुई है। ब्लॉक डील में बड़ी संख्या में शेयरों के हस्तांतरण से शेयर की आपूर्ति में अस्थायी बढ़ोतरी होती है, जिससे शेयर मूल्य पर दबाव पड़ता है। निवेशकों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए शेयर बेचकर बाजार में हिस्सेदारी घटाई।
विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में ITC की सिगरेट बिक्री पर बढ़ा कर असर डाल सकता है, लेकिन कंपनी की मजबूत ब्रांड पोजीशन और वफादार ग्राहक आधार के कारण दीर्घकालिक असर सीमित रह सकता है। हालांकि, यदि कर बोझ बहुत अधिक हुआ तो मुनाफे की मार्जिन पर असर पड़ सकता है, जिससे निवेशकों की सतर्कता बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, ITC के शेयर बाजार में गिरावट और सिगरेट पर कर वृद्धि का मिलाजुला असर है। निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी इस नए कर ढांचे में कैसे अपने मुनाफे को बनाए रखती है और क्या अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों से इसे संतुलित कर पाएगी।
ITC की सिगरेट खपत और राजस्व में वृद्धि पिछले वर्षों में लगातार रही है, लेकिन अब बढ़े हुए करों और नीतिगत बदलावों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक और विश्लेषक आगामी तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और राजस्व वृद्धि पर गहरी निगाह बनाए हुए हैं।
इस तरह, ITC की सिगरेट से जुड़ी रणनीतियां, कर वृद्धि और ब्लॉक डील की वजह से शेयर मूल्य में कमी आई है, और आने वाले समय में इस पर नजर रखना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।