लखनऊ: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ी और सशक्त घोषणा की है। प्रदेश में रहने वाले वे किसान जो पशुपालन, मधुमक्खी पालन या मशरूम उत्पादन जैसे कृषि से जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत हैं, उन्हें अब राज्य सरकार द्वारा प्रतिदिन ₹252 या प्रतिमाह ₹6553 की सीधी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह निर्णय न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल भी साबित होगा।
न्यूनतम मजदूरी दर में हुआ बदलाव
सरकार की ओर से यह सहायता दरअसल न्यूनतम मजदूरी दर में वृद्धि के रूप में दी जा रही है। पशुपालन, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन जैसे कामों को अब संरचित स्वरूप में मान्यता दी जा रही है, जिससे इन क्षेत्रों में कार्यरत लोगों को सरकारी श्रमिक दर के अनुसार मजदूरी मिल सकेगी। यह वृद्धि सीधे तौर पर उन्हें लाभ पहुंचाएगी जो अब तक इन कार्यों से जुड़कर भी पारिश्रमिक या आय में स्थायित्व महसूस नहीं कर पा रहे थे।
कौन-कौन होंगे लाभार्थी?
इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निम्नलिखित कार्यों में संलग्न हैं:
- पशुपालन – जैसे गाय, भैंस, बकरी पालन आदि
- मधुमक्खी पालन – शहद उत्पादन करने वाले किसान
- मशरूम उत्पादन – कृषि आधारित उत्पाद तैयार करने वाले छोटे किसान या उद्यमी
- इसके अलावा, जिन किसानों की आय का मुख्य स्रोत ये कार्य हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा है कि, “हमारा लक्ष्य किसानों की आमदनी को दोगुना करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन देना है। ये योजनाएं सिर्फ अनुदान नहीं, बल्कि स्वाभिमान की दिशा में उठाया गया कदम हैं।” इस योजना से हजारों किसान परिवारों को आर्थिक सुरक्षा, नियमित आय और स्वावलंबन का भरोसा मिलेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
पशुपालन, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के मजबूत स्रोत बन सकते हैं। सरकार का यह प्रयास न केवल इन सेक्टरों को औपचारिक रूप में लाएगा, बल्कि स्थानीय बाजार और स्टार्टअप मॉडल को भी प्रोत्साहित करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे कृषि आधारित छोटे उद्योग विकसित होंगे और गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।
आसान आवेदन और पारदर्शिता
सरकार द्वारा दी जाने वाली यह सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से पहुंचाई जाएगी। इसके लिए किसानों को एक सरल पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करना होगा, जहां वे अपने पशुपालन, मधुमक्खी या मशरूम उत्पादन कार्य से संबंधित विवरण भर सकते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निगरानी समिति भी गठित की जाएगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
हालांकि सरकार की इस योजना की कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों द्वारा सराहना की जा रही है, कुछ विपक्षी दलों ने इसे आगामी चुनावों से जोड़ते हुए राजनीतिक स्टंट करार दिया है। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला लंबे समय से नीति-निर्माण प्रक्रिया में था और इसका मकसद केवल किसान कल्याण है।