वैज्ञानिकों ने लंबे जीवन और बेहतर उम्र बढ़ने के रहस्यों को जानने के लिए सदी पार करने वाले लोगों के खून का अध्ययन किया है। हालिया शोध से पता चलता है कि 100 साल या उससे अधिक उम्र तक जीवित रहने वाले लोग – जिन्हें सेंचुरीनियर्स और 110 साल से अधिक उम्र के सुपरसेंचुरीनियर्स कहा जाता है – के खून में कुछ अनोखे जैविक संकेत होते हैं, जो उनके स्वास्थ्य और लंबी उम्र से जुड़े हो सकते हैं।
शोध में पाया गया है कि ये अनोखे रक्त प्रोफाइल 65 साल की उम्र में भी पहचाने जा सकते हैं, यानी जब व्यक्ति अभी अत्यधिक वृद्धावस्था तक नहीं पहुंचा होता। यह संकेत बताते हैं कि लंबी उम्र केवल भाग्य या जेनेटिक्स का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे शरीर में मौजूद जैविक और मेटाबॉलिक संरचनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
स्पेन में हाल ही में हुई एक स्टडी में सुपरसेंचुरीनियर मारिया ब्रान्यस (Maria Branyas) के स्वास्थ्य और रक्त का विश्लेषण किया गया, जिन्होंने 117 साल की उम्र तक जीवन व्यतीत किया। उनके खून में इम्यून सिस्टम मजबूत था और “खराब” कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत कम पाई गई। उनके शरीर की कोशिकाएं अपने वास्तविक उम्र से कहीं अधिक युवा व्यवहार कर रही थीं।
रूढ़िवादी सोच के विपरीत, ब्रान्यस की टेलोमेर्स – जो उम्र बढ़ने और बीमारियों से जुड़े होते हैं – बहुत छोटी थीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उनकी लंबी उम्र का कारण भी बन सकता है, क्योंकि छोटी टेलोमेर्स अनियंत्रित कोशिकीय वृद्धि को रोककर कैंसर जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
चीन में किए गए एक अध्ययन में 65 सेंचुरीनियर्स के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इनमें फैटी एसिड और अन्य मेटाबॉलाइट्स की मात्रा कम थी, जबकि युवा लोगों में यह स्तर अधिक था। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में ऐसे मेटाबॉलिक पैटर्न से किसी व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा का अनुमान लगाया जा सकता है और इसे “लॉन्जेविटी क्लॉक” के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, फिलहाल कोई भी खून का टेस्ट यह निश्चित रूप से नहीं बता सकता कि कोई व्यक्ति कितने साल जी पाएगा। लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि जीवनशैली, आहार और मेटाबॉलिज़्म इसमें निर्णायक भूमिका निभाते हैं। लंबी उम्र से जुड़े कई संकेत पोषण से जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, ब्रान्यस ने भूमध्यसागरीय (Mediterranean) आहार का पालन किया था, जिसमें ताजगी भरी सब्जियां, फल, ओमेगा-3 युक्त मछली और संतुलित वसा शामिल हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लंबे जीवन वाले लोगों के खून का अध्ययन केवल लंबी उम्र की भविष्यवाणी तक सीमित नहीं है। इससे नई दवाओं, जीवनशैली सुधारों और स्वास्थ्य रणनीतियों को विकसित करने में मदद मिल सकती है। यह शोध बताता है कि उम्र बढ़ने के प्राकृतिक प्रभाव को धीमा करना और उम्र के साथ स्वस्थ रहना संभव हो सकता है।
वैज्ञानिक इस दिशा में आशावादी हैं कि आगे के वर्षों में सेंचुरीनियर्स और सुपरसेंचुरीनियर्स के रक्त से मिली जानकारी से सामान्य लोगों के लिए भी लंबी और स्वस्थ जीवन की रणनीतियां बनाई जा सकेंगी। साथ ही, यह शोध यह भी इंगित करता है कि हमारे शरीर में पहले से मौजूद जैविक संकेतों को समझकर हम उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो, खून में मौजूद कुछ जैविक और मेटाबॉलिक संकेत लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के रहस्य को उजागर कर सकते हैं। हालांकि यह अभी शुरुआती अध्ययन हैं, लेकिन ये खोजें भविष्य में स्वास्थ्य विज्ञान और जीवन प्रत्याशा के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित हो सकती हैं।