विन न्यूज़ नेटवर्क। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और प्रशासन के बीच एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला स्थित टीएमसी सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। प्रशासन की कार्रवाई के एक दिन बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए फिलहाल आगे की तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है और अगली सुनवाई तक मौजूदा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अभिषेक बनर्जी ने राज्य प्रशासन और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई और इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार को जिला प्रशासन ने अमतला स्थित कार्यालय के सामने के हिस्से पर बुलडोजर चलाया। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण से संबंधित आवश्यक अनुमति और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे तथा संबंधित पक्ष को पहले नोटिस भी जारी किए गए थे।
प्रशासन के अनुसार, कथित अवैध निर्माण की शिकायत मिलने के बाद 15 जुलाई को नोटिस जारी कर पक्षकारों से जवाब मांगा गया था। अधिकारियों का दावा है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
हाईकोर्ट से टीएमसी को मिली अंतरिम राहत
कार्रवाई के बाद मामला कोलकाता हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने फिलहाल निर्माण को और नुकसान पहुंचाने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल प्रशासन आगे की कार्रवाई नहीं कर सकेगा। अब मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखेंगे।
अभिषेक बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप
रविवार को अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई पोस्ट साझा करते हुए प्रशासन और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि अमतला स्थित कार्यालय वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बनाया गया था और आवश्यक स्वीकृतियां ली गई थीं। उनका कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य राजनीतिक दबाव बनाना है।
अभिषेक ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय में रखे लैपटॉप, प्रिंटर, दस्तावेज और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को अदालत में पूरी मजबूती से उठाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।
प्रशासन का पक्ष क्या है?
जिला प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित जमीन और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था।
प्रशासन का यह भी कहना है कि नोटिस का जवाब निर्धारित समय में नहीं मिलने के कारण नियमानुसार आगे की कार्रवाई की गई। फिलहाल पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
क्यों अहम माना जाता है अमतला का यह कार्यालय?
अमतला स्थित यह कार्यालय डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां से संगठनात्मक बैठकों, जनसंपर्क अभियानों और चुनावी रणनीतियों का संचालन होता रहा है।
दक्षिण 24 परगना जिला लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में इस कार्यालय पर हुई कार्रवाई को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टीएमसी और भाजपा के बीच बढ़ा टकराव
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। टीएमसी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमों के अनुरूप की गई है।
आने वाले दिनों में यह मामला अदालत के साथ-साथ राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लग गई है। अब अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि प्रशासन की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
इस बीच दोनों पक्ष अपने-अपने दावों और दस्तावेजों के साथ अदालत में पेश होंगे। मामले का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।