बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट ने NDA के भीतर सियासी हलचल तेज कर दी है। जहां बीजेपी और जदयू ने पहले ही चार सीटों के उम्मीदवार तय कर लिए हैं, वहीं बची सीट के लिए HAM, RLM और LJP-R ने दावेदारी पेश की है।
HAM के पवन मांझी पुराने गठबंधन वादों का हवाला देते हुए सीट मांग रहे हैं और उनका कहना है कि पिछली बार गठबंधन में उनकी भूमिका अहम रही है।
दूसरी ओर, लोजपा-आर के चिराग पासवान अपनी पार्टी के विधायकों की संख्या और जनाधार के आधार पर दावेदारी कर रहे हैं, साथ ही उनका यह भी कहना है कि उनके योगदान को नजरअंदाज करना गठबंधन के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पांचवीं सीट पर मुकाबला रोमांचक होगा। HAM और LJP-R के बीच पुराने वादों और विधायकों की संख्या के आधार पर टकराव बढ़ रहा है। NDA नेतृत्व की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है, क्योंकि शीर्ष नेताओं के हस्तक्षेप और समझौतों के आधार पर ही अंतिम उम्मीदवार तय होगा। इस सीट का परिणाम न केवल बिहार की राजनीति बल्कि NDA के गठबंधन की सामूहिक रणनीति और भविष्य पर भी बड़ा असर डालेगा।
बड़ी बात यह है कि सीट पर HAM और लोजपा-आर के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है, और राजनीतिक दांव-पेंच अगले कुछ हफ्तों में साफ दिखाई देंगे।