पटना। बिहार की सियासत में बुधवार को उस समय हलचल मच गई जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अति पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश प्रसाद चौरसिया ने पार्टी से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का दामन थाम लिया। चौरसिया ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ राजद के प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। यह कदम सियासी रूप से खासा अहम माना जा रहा है, विशेषकर आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में।
राजद की सदस्यता समारोह में उत्साह का माहौल
इस अवसर पर राजद प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. तनवीर हसन ने चौरसिया को पार्टी में शामिल करते हुए उन्हें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जीवनी भेंट की और पार्टी की विचारधारा से अवगत कराया। समारोह में राजद के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को एक बड़ा सियासी संदेश देने वाला बना दिया।
डॉ. तनवीर हसन का तीखा हमला: “संविधान खतरे में है” राजद के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. तनवीर हसन ने मौके पर भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि: "देश का संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक समरसता खतरे में है। जिस तरह से एक खास विचारधारा थोपने की कोशिश की जा रही है, उससे जनता में आक्रोश है। अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर इसके खिलाफ एकजुट हों।" उन्होंने यह भी कहा कि सुरेश चौरसिया जैसे सामाजिक रूप से सक्रिय और अति पिछड़े वर्ग के नेताओं का राजद में आना पार्टी के जनाधार को मजबूत करेगा।
सुरेश चौरसिया का बयान: “भाजपा अब गरीबों की नहीं रही”
राजद की सदस्यता ग्रहण करने के बाद सुरेश प्रसाद चौरसिया ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा: "मैं भाजपा में लंबे समय तक रहा, लेकिन अब पार्टी की नीति और नीयत बदल चुकी है। अति पिछड़े वर्गों की आवाज दबाई जा रही है, और पार्टी सिर्फ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमटकर रह गई है। मैं अब सामाजिक न्याय, समता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए राजद के साथ हूँ।"
समर्थकों में जोश, नारेबाज़ी से गूंजा पार्टी कार्यालय
चौरसिया के साथ आए समर्थकों में खासा उत्साह देखा गया। “लालू जिंदाबाद, सामाजिक न्याय जिंदाबाद, संविधान बचाओ” जैसे नारों से राजद कार्यालय गूंज उठा। समर्थकों का कहना था कि भाजपा में उन्हें केवल दिखावे की जिम्मेदारियाँ दी जाती थीं, जबकि फैसले चंद नेताओं तक सीमित रहते थे।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या है इस कदम का असर?
सुरेश चौरसिया का राजद में आना भाजपा के लिए राजनीतिक तौर पर झटका माना जा रहा है। चौरसिया अति पिछड़ा वर्ग (EBC/OBC) के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और उनकी पकड़ ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, खासकर सीमांचल और मगध क्षेत्रों में।
भाजपा की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं
हालांकि सुरेश चौरसिया के इस कदम के बाद मीडिया ने भाजपा के राज्य नेतृत्व से संपर्क किया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी के अंदरूनी स्तर पर यह मुद्दा चर्चा में है और जल्द ही पार्टी कोई बयान जारी कर सकती है।
राजद में शामिल हुए अन्य प्रमुख नेता
सिर्फ सुरेश चौरसिया ही नहीं, उनके साथ दर्जनों पंचायत प्रतिनिधि, छात्र नेता, और महिला कार्यकर्ता भी राजद में शामिल हुए। राजद ने इन सभी को पार्टी के विभिन्न सेल में जिम्मेदारी देने की बात कही है। इस सामूहिक प्रवेश को राजद ने “समावेशी राजनीति की जीत” बताया है।