बाराबंकी। बाराबंकी जिले में शनिवार की सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब हैदरगढ़ की ओर जा रही एक यात्री बस पर बरगद का विशाल पेड़ गिर पड़ा। हादसा इतना भयावह था कि बस के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए और उसमें बैठे यात्री दब गए। घटना में पांच शिक्षकों समेत कुल छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 17 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग व पुलिस बचाव कार्य में जुट गए।
हादसा कैसे हुआ
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 8:30 बजे बस बाराबंकी से हैदरगढ़ की ओर जा रही थी। तभी सतरिख क्षेत्र में तेज बारिश और हवा के बीच सड़क किनारे खड़ा वर्षों पुराना बरगद का पेड़ अचानक जड़ों समेत उखड़कर सड़क पर आ गिरा। यह सीधा बस के ऊपर गिरा, जिससे बस का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह दब गया। अंदर बैठे यात्री संभल पाते उससे पहले कई लोग मलबे के नीचे फंस गए।
मौत का मंजर
हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को भागने या बचाव का मौका तक नहीं मिला। बस में सवार कई यात्री स्थानीय स्कूलों के शिक्षक थे, जो परीक्षा ड्यूटी पर जा रहे थे। उनमें से पांच शिक्षकों की मौके पर ही मौत हो गई। एक अन्य यात्री की भी घटनास्थल पर मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए बस के शीशे तोड़े। कई यात्रियों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सतरिख भेजा गया।
घायलों की हालत गंभीर
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, 17 घायलों में से कई की हालत नाजुक है। चिकित्सकों ने बताया कि घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ रेफर किया जा सकता है। जिला प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए विशेष टीम गठित की है और सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
प्रशासनिक कार्रवाई और मुआवजा
हादसे की जानकारी मिलते ही बाराबंकी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की राहत राशि देने के निर्देश दिए। साथ ही घायलों के समुचित इलाज के निर्देश भी जारी किए।
स्थानीय लोगों का गुस्सा
घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा देखने को मिला। उनका कहना था कि यह बरगद का पेड़ कई साल पुराना था और काफी समय से इसकी शाखाएं कमजोर हो चुकी थीं, लेकिन संबंधित विभाग ने समय रहते इसे हटाने का प्रयास नहीं किया। लोगों का आरोप है कि लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ।
बरगद के पेड़ की अहमियत और खतरा
बरगद के पेड़ को भारतीय संस्कृति में पूजनीय माना जाता है, लेकिन जब ये पेड़ बूढ़े हो जाते हैं और जड़ों की पकड़ कमजोर पड़ जाती है, तो तेज बारिश और आंधी में इनके गिरने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क किनारे खड़े पुराने पेड़ कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पेड़ों की समय-समय पर जांच और रखरखाव जरूरी है।
पीड़ित परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़
हादसे में मारे गए पांच शिक्षक और एक अन्य यात्री के घरों में मातम छा गया है। कई परिवारों के कमाने वाले सदस्य की मौत ने उनके जीवन में गहरा खालीपन छोड़ दिया है। मृतकों के परिजन बेसुध हालत में रोते-बिलखते देखे गए।
भविष्य में रोकथाम के उपाय
यह हादसा एक चेतावनी है कि मानसून के दौरान पुराने और कमजोर पेड़ों की जांच कर उन्हें समय पर हटाना जरूरी है। जिला प्रशासन ने घोषणा की है कि सड़क किनारे खड़े ऐसे सभी कमजोर पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।