बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन से ठीक पहले अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने अपने विदाई संबोधन में कहा कि उनके 18 महीने के शासन ने देश की विदेश नीति को नई दिशा दी है और अब बांग्लादेश किसी के दबाव में चलने वाला राष्ट्र नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने तीन बुनियादी स्तंभ — संप्रभुता, राष्ट्रीय हित और गरिमा को फिर से स्थापित किया, जिससे देश वैश्विक मंच पर अधिक आत्मविश्वासी और सक्रिय हुआ है। यूनुस ने दावा किया कि अब बांग्लादेश अपनी स्वतंत्र नीतियों के आधार पर फैसले लेने में सक्षम है और अन्य देशों के निर्देशों पर निर्भर रहने का दौर समाप्त हो चुका है।
दरअसल, अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत यूनुस ने सत्ता संभाली थी। अब हाल ही में हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिला है और इसके अध्यक्ष तारीक रहमान मंगलवार को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। 13वें संसदीय चुनाव में पार्टी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
अपने संबोधन में यूनुस ने सभी नागरिकों से दल, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एक न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक बांग्लादेश के निर्माण में सहयोग जारी रखने की अपील की। उन्होंने आम चुनाव शांतिपूर्ण कराने में सेना के सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया और कहा कि देश अब एक नए राजनीतिक अध्याय में प्रवेश कर रहा है।
विदाई भाषण में यूनुस ने क्षेत्रीय सहयोग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने नेपाल, भूटान और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जिन्हें अक्सर “सेवन सिस्टर्स” कहा जाता है के साथ व्यापक आर्थिक और संपर्क सहयोग की संभावनाओं का जिक्र किया। उनका कहना था कि समुद्री मार्ग केवल भौगोलिक सीमा नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रवेश द्वार है और भविष्य के विकास के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी अहम भूमिका निभाएगी।
यूनुस के इस बयान को दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई सरकार के गठन के साथ बांग्लादेश की विदेश नीति और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा पर भी नजरें टिकी हुई हैं।