पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल से भर गई है। पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान से मुलाकात की अनुमति न मिलने पर राजनीतिक तनाव तेज हो गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने आरोप लगाया है कि अदालत के आदेश के बावजूद उन्हें इमरान खान से मिलने नहीं दिया गया। इसी मुद्दे पर PTI ने मंगलवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद पूरे देश में तीखी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
अदालत के आदेश के बावजूद मुलाकात न होना विवाद का कारण
सोहेल अफरीदी के अनुसार, इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें इमरान खान से जेल में मुलाकात की अनुमति दी थी। लेकिन जब वे मिलने पहुंचे, तो सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने की इजाज़त नहीं दी। अफरीदी का कहना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि प्रतिशोध की राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि अदालत के आदेश को नजरअंदाज करना न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाता है और लोकतंत्र में ऐसी अवहेलना गंभीर रूप से चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, ‘जब अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है, तब एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को अपने ही नेता से मिलने से रोकना यह दर्शाता है कि सरकार किस तरह संस्थाओं पर दबाव बना रही है। यह लोकतंत्र के खिलाफ है और हम इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।’
PTI का प्रदर्शन: मुख्य न्यायाधीश के सामने विरोध
सोहेल अफरीदी ने इस मामले को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने घोषणा की है कि मंगलवार सुबह सभी PTI सांसद, विधायक और शीर्ष नेता सबसे पहले इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहुँचेंगे। उनका उद्देश्य है कि अदालत के मुख्य न्यायाधीश को सीधे रूप से बताया जाए कि उनकी अनुमति के बाद भी मुलाकात क्यों नहीं कराई गई। यह सीधे-सीधे सरकारी एजेंसियों पर सवाल खड़ा करता है।
अफरीदी ने कहा, ‘हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। हम अदालत के सम्मान में खड़े हैं। लेकिन जब अदालत का आदेश ही लागू नहीं हो रहा, तो यह किसकी जिम्मेदारी है? हम इसे अदालत के सामने रखेंगे और न्याय की मांग करेंगे।’
इमरान खान के खिलाफ कई मामले, PTI सरकार पर भेदभाव का आरोप
इमरान खान पिछले कई महीनों से विभिन्न कानूनी मामलों के चलते जेल में बंद हैं। उन पर भ्रष्टाचार, राज्य रहस्य उल्लंघन और हिंसा भड़काने जैसी कई धाराओं में केस दर्ज हैं। PTI लगातार कहती रही है कि इन मामलों में राजनीतिक प्रतिशोध की बू आती है। पार्टी का आरोप है कि सरकार और सेना की कुछ ताकतें मिलकर इमरान खान को राजनीति से दूर रखने की कोशिश कर रही हैं।
इस मुलाकात विवाद ने इन आरोपों को और हवा दे दी है। PTI नेताओं का कहना है कि अगर सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो वह मुलाकात होने क्यों नहीं दे रही? उनका दावा है कि यह इमरान खान को अलग-थलग रखने की रणनीति का हिस्सा है।
सरकार की ओर से सफाई ‘सुरक्षा कारण’
दूसरी ओर, सरकारी सूत्रों का कहना है कि मुलाकात न कर पाने का कारण “सुरक्षा संबंधी खतरे” थे। उनका कहना है कि जेल प्रशासन ने ऐसी इनपुट दी थी जिससे मुलाकात कराना जोखिम भरा हो सकता था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अदालत के आदेश का पालन जरूरी है और इस पर चर्चा की जा रही है। लेकिन PTI को यह तर्क बिल्कुल स्वीकार नहीं है। उनके अनुसार, सुरक्षा का हवाला देकर नेता-प्रतिनिधियों को रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
पाकिस्तान में बढ़ सकता है सियासी तनाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा पाकिस्तान की सियासत को और अस्थिर कर सकता है।
अदालत के बाहर प्रदर्शन
सरकार पर बढ़ता दबाव
PTI का आक्रामक रुख
इमरान खान समर्थकों की बढ़ती बेचैनी
ये सभी कारक मिलकर किसी बड़े राजनीतिक टकराव का संकेत दे रहे हैं। यदि प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ती है या अदालत सरकार से सवाल पूछती है, तो राजनीति और गर्मा सकती है। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट, आंतरिक अस्थिरता और प्रांतों के बीच तनाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
अब क्या होगा?
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मुख्य न्यायाधीश मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान क्या रुख अपनाते हैं।
क्या वे सरकार से जवाब मांगेंगे?
क्या मुलाकात की तारीख तय होगी?
क्या प्रशासन पर सवाल उठेंगे?
या फिर मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सिमट जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि इमरान खान से मुलाकात न होने की इस घटना ने पाकिस्तान में एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है, जिसके प्रभाव आने वाले दिनों में और गहराएंगे।