लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान की रिहाई के बाद लखनऊ में जनता और राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त चर्चा देखने को मिली। जैसे ही रिहाई की खबर सामने आई लखनऊ के विभिन्न इलाकों में लोगों की भीड़ देखने को मिली। लोग न सिर्फ आज़म खान के समर्थन या विरोध में राय रखते दिखे बल्कि कई लोगों ने इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा।
जनता की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
लखनऊ के चौक, हजरतगंज, गोमतीनगर जैसे प्रमुख इलाकों में आम लोगों से बातचीत में सामने आया कि आज़म खान को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा,’आज़म खान एक दमदार नेता हैं, अगर उन्हें बेवजह फंसाया गया है तो न्याय मिलना चाहिए। वहीं दूसरी ओर लोगों ने कहा, कानून को अपना काम करने देना चाहिए। अगर किसी ने गलत किया है, तो उसे सजा भी मिलनी चाहिए चाहे वो कोई भी हो।
बीजेपी और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी
आज़म खान की रिहाई को लेकर राजनीतिक दलों ने भी अलग-अलग रुख अपनाया है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि “जनता भाजपा पर आज भी भरोसा करती है और आने वाले चुनाव में एक बार फिर भाजपा को बहुमत मिलेगा। वहीं विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस बात के संकेत दिए हैं कि आज़म खान आने वाले समय में बसपा का रुख कर सकते हैं जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। एक स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक का कहना है, अगर आज़म खान सच में बसपा में जाते हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है। इससे सपा को बड़ा नुकसान हो सकता है और बसपा को मजबूती मिल सकती है।
आगे की राजनीति पर नजरें
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज़म खान रिहाई के बाद क्या अगला राजनीतिक कदम उठाते हैं। क्या वे सपा में बने रहेंगे या फिर बसपा जैसे किसी अन्य दल की ओर रुख करेंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
नतीजा
आज़म खान की रिहाई ने सिर्फ एक कानूनी मुद्दे को नहीं बल्कि एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। जनता से लेकर सियासी गलियारों तक हर कोई इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहा है। अब देखना ये होगा कि इस रिहाई के बाद यूपी की राजनीति कौन सा नया मोड़ लेती है।