अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कल यानी 1 अप्रैल का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है. अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा (NASA) अपने ‘आर्टेमिस 2’ मिशन को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 1972 के ‘अपोलो’ मिशन के बाद यह पहला मौका है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low-Earth Orbit) को छोड़कर चंद्रमा की ओर कदम बढ़ाएगा.
क्या है आर्टेमिस 2 मिशन?
आर्टेमिस 2 नासा के उस बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है जिसका अंतिम लक्ष्य चंद्रमा पर इंसानों की स्थाई मौजूदगी बनाना और भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) तक पहुँचने का रास्ता साफ करना है. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्रियों को ओरियन स्पेसक्राफ्ट में बिठाकर चांद के चारों ओर चक्कर लगाने के लिए भेजा जा रहा है.
कौन हैं वे 4 जांबाज एस्ट्रोनॉट्स?
इस मिशन की कमान चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों के हाथ में है, जो पिछले कई सालों से इसकी कठिन ट्रेनिंग ले रहे हैं
रीड वाइसमैन (कमांडर): मिशन का नेतृत्व कर रहे वाइसमैन 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जा चुके हैं.
विक्टर ग्लोवर (पायलट): नेवी कैप्टन ग्लोवर ISS में लंबे समय तक रहने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री बनकर इतिहास रच चुके हैं.
क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट): इनके नाम सबसे लंबी सिंगल अंतरिक्ष उड़ान भरने वाली महिला का रिकॉर्ड है.
जेरेमी हैनसेन: कनाडाई स्पेस एजेंसी के जेरेमी इस मिशन के जरिए अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा करेंगे.
10 दिनों का सफर: क्या-क्या होगा वहां?
यह मिशन कुल 10 दिनों का होगा, जिसे कुछ चरणों में बांटा गया है.
शुरुआती सफर: लॉन्च के बाद पहले दिन यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलेगा। अगले 3 से 4 दिन इसे चांद तक पहुँचने में लगेंगे.
चांद के करीब: यान चंद्रमा के सबसे दूर वाले हिस्से (Far Side) का चक्कर लगाएगा। इस दौरान एस्ट्रोनॉट्स पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड बना सकते हैं.
वापसी: चांद का चक्कर काटने के बाद ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी’ तकनीक का इस्तेमाल कर यान 4 दिनों में वापस पृथ्वी लौटेगा। खास बात यह है कि वापसी के लिए अतिरिक्त ईंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी.
मिशन का मुख्य उद्देश्य
इस यात्रा के दौरान नासा अपने स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन यान के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ का पहली बार इंसानों के साथ परीक्षण करेगा. इसके अलावा, अंतरिक्ष में रेडिएशन से सुरक्षा, इमरजेंसी प्रोटोकॉल और लेजर आधारित एडवांस कम्युनिकेशन तकनीक को भी जांचा जाएगा.