गोंडा जिले के कर्नलगंज में शुक्रवार की सुबह एक नाटकीय और संवेदनशील घटना सामने आई जिसने स्थानीय प्रशासन को हिला कर रख दिया। मसौलिया निवासी किसान शिवकुमार, जो पिछले पांच वर्षों से दुकान विवाद को लेकर न्याय की गुहार लगा रहा है, गोंडा-लखनऊ हाईवे पर स्थित कोतवाली के सामने पानी की टंकी पर चढ़ गया और आत्महत्या करने की धमकी दे दी।
शिवकुमार के इस कदम से इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग और राहगीर रुककर तमाशबीन बन गए, वहीं सूचना मिलते ही प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों में खलबली मच गई।
किसान की पीड़ा – “धन और रसूख न हो तो इंसाफ नहीं मिलता”
पानी की टंकी पर चढ़े शिवकुमार ने प्रशासन पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उसने चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि वह पांच सालों से अफसरों की चौखट पर माथा टेक रहा है, लेकिन उसका दुकान विवाद आज तक हल नहीं हुआ। “हर बार सिर्फ जांच और टीम गठित होती है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती,” शिवकुमार ने कहा।
उसका आरोप है कि प्रशासन सिर्फ रसूखदारों की सुनता है, आम आदमी के लिए न्याय केवल एक सपना है। “क्या आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं? क्या मेरे पास पैसा और पहुंच नहीं है, इसलिए मुझे इंसाफ नहीं मिलेगा?” शिवकुमार ने कहा।
प्रशासन की कोशिशें जारी – दो घंटे से मनाने में जुटे अधिकारी
शिवकुमार की आत्महत्या की धमकी के बाद प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। एसडीएम, सीओ, थाना प्रभारी सहित जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। अधिकारी लगातार माइक के माध्यम से उसे समझाने और शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि खबर लिखे जाने तक दो घंटे बीत चुके हैं और शिवकुमार अब भी नीचे उतरने को तैयार नहीं है। प्रशासन को आशंका है कि उसके पास कोई ज्वलनशील पदार्थ भी हो सकता है, जिससे वह आत्मदाह कर सकता है।
हाईवे पर यातायात प्रभावित, लोगों में गुस्सा और सहानुभूति दोनों
घटना स्थल के पास स्थित गोंडा-लखनऊ हाईवे पर जाम जैसी स्थिति बन गई है। लोग घटनास्थल के पास जमा हैं और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोग किसान के साहस को सलाम कर रहे हैं, तो कुछ इस प्रकार के आत्मघाती कदम को गलत भी बता रहे हैं।
पुराना मामला, लेकिन हल नहीं – जिम्मेदार कौन?
सूत्रों के मुताबिक, शिवकुमार की दुकान को लेकर भूमि विवाद या आवंटन में अनियमितता है, जिसे लेकर वह कचहरी, तहसील और प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार संपर्क करता रहा है। लेकिन फाइलें सिर्फ मेज से मेज पर घूमती रहीं, समाधान कभी नहीं हुआ।