केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार (30 मार्च, 2026) को लोकसभा में देश की आंतरिक सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक लंबे और दर्दनाक समय तक नक्सलवाद की समस्या से जूझता रहा है, जिसने हजारों निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों की जान ली। लेकिन आज गर्व के साथ यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश को इस समस्या से प्रभावी रूप से ‘आजादी’ मिल गई है।
अमित शाह ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का जिक्र करते हुए कहा कि जो इलाका कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, वहां अब विकास की बयार बह रही है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सुरक्षाबलों के कड़े प्रहार और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।
गृहमंत्री ने बताया कि सरकार ने केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं की, बल्कि उन इलाकों में सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पतालों का जाल बिछाकर नक्सलियों की विचारधारा को जड़ से खत्म किया है। उन्होंने कहा, “नक्सलवाद केवल बंदूक की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह विकास के रास्ते में खड़ा एक अवरोध था। हमने उस अवरोध को हटा दिया है।”
अमित शाह ने विपक्षी दलों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि नक्सलवाद अब कुछ गिने-चुने पॉकेट्स तक सिमट कर रह गया है, जिन्हें बहुत जल्द पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय उन जवानों को दिया जिन्होंने घने जंगलों में रहकर अपनी जान की बाजी लगाई। गृहमंत्री के इस बयान के बाद सदन में मेजें थपथपाकर इस उपलब्धि का स्वागत किया गया।