अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूस से तेल खरीदने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने सीधा-सीधा कहा कि भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए। उन्होंने यह तक कह डाला कि अगर भारत ऐसा करता रहा, तो इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है। लेकिन भारत सरकार ने ट्रंप की इस धमकी पर साफ कर दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हित में फैसले लेता है और अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुकने वाला नहीं है। भारत ने दो टूक कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और किफायती कीमत पर कच्चा तेल खरीदना हमारी प्राथमिकता है, और इसके लिए किसी भी देश से समझौता किया जा सकता है — चाहे वह रूस ही क्यों न हो।
पुतिन का संभावित दौरा: अमेरिका को बड़ा झटका?
इन सबके बीच भारत ने एक और बड़ा संकेत दिया है जो ट्रंप और अमेरिका के लिए कूटनीतिक रूप से एक झटका साबित हो सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस महीने भारत की यात्रा पर आ सकते हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दी। हालांकि, डोभाल ने यह स्पष्ट किया कि यात्रा की तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन तैयारियां पूरी की जा रही हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव चरम पर है। अमेरिका और यूरोप, रूस पर लगातार प्रतिबंध लगा रहे हैं, लेकिन भारत ने हमेशा तटस्थ और संतुलित नीति अपनाई है, जो उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता को दर्शाता है।
भारत-रूस तेल व्यापार: क्या है सच्चाई?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और रूस से भारत ने बीते वर्षों में तेल खरीद बढ़ाई है, क्योंकि रूस ने वैश्विक बाजार से काफी सस्ती दरों पर तेल बेचा। भारत ने हमेशा यह कहा है कि रूस से तेल खरीदना कोई राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक निर्णय है। भारत ने वैश्विक मंचों पर कई बार यह स्पष्ट किया है कि ऊर्जा की सुलभता और सस्ते दाम पर आपूर्ति हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
अमेरिका बनाम भारत: कूटनीतिक संतुलन
ट्रंप की इस चेतावनी को अमेरिका के उस पुराने रवैये का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह अपने रणनीतिक साझेदारों से अपेक्षा करता है कि वे उसके विरोधियों से दूरी बनाए रखें। लेकिन भारत ने हमेशा अपनी गैर-पक्षपाती विदेश नीति का पालन किया है। भारत न तो रूस के पक्ष में और न ही अमेरिका के विरोध में है — बल्कि भारत का जोर “भारत फर्स्ट” पर है।
भारत की स्थिति: स्पष्ट और निर्भीक
भारत ने रूस से संबंधों को लेकर हमेशा यह स्पष्ट किया है कि भारत-रूस संबंध ऐतिहासिक और मजबूत हैं। चाहे रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा या व्यापार — हर क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग गहरा रहा है। ट्रंप की बयानबाजी के बावजूद, भारत की नीति स्पष्ट है: “हम किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं आएंगे। हमारी प्राथमिकता हमारे नागरिकों का हित है।”
पुतिन के दौरे से क्या उम्मीद?
व्लादिमीर पुतिन का प्रस्तावित भारत दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नया आयाम देगा। इस दौरान निम्न मुद्दों पर बातचीत की संभावना है:
- रक्षा सौदे और संयुक्त उत्पादनऊर्जा सहयोग (तेल-गैस, परमाणु ऊर्जा)
- भारत-रूस व्यापार को अमेरिकी डॉलर की जगह रुपया-रूबल में बदलने पर चर्चा
- ब्रिक्स (BRICS) और वैश्विक मंचों पर सहयोग
- यूक्रेन युद्ध और भारत की भूमिका
- इस दौरे का राजनीतिक संदेश स्पष्ट होगा — भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र है और किसी के दबाव में नहीं आएगा।
क्या पुतिन का दौरा अमेरिका को खलेगा?
संभावना यही है कि पुतिन की भारत यात्रा अमेरिका को राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से असहज करेगी। इससे पहले भी अमेरिका ने भारत-रूस की नजदीकियों पर चिंता जताई है, लेकिन भारत ने हमेशा संयम और दृढ़ता के साथ जवाब दिया है।