अमेरिका ने ईरानी एटमी ठिकानों पर बमबारी की : ट्रम्प बोले- फोर्डों समेत 3 परमाणु ठिकाने तबाह किए, ईरान ने इजराइल के 14 शहरों पर मिसाइलें दागीं

नेतन्याहू बोले- धन्यवाद राष्ट्रपति ट्रम्प, आपका ईरान के अंदर परमाणु ठिकानों पर हमला करने का कड़ा कदम उठाया है। यह इतिहास बदल देगा।

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अमेरिका ने ईरानी एटमी ठिकानों पर बमबारी की : ट्रम्प बोले- फोर्डों समेत 3 परमाणु ठिकाने तबाह किए, ईरान ने इजराइल के 14 शहरों पर मिसाइलें दागीं

तेहरान/तेल अवीव : अमेरिका ने ईरान में 3 परमाणु ठिकानों पर हमला किया है। ये ठिकाने फोर्डो, नतांज और इस्फहान हैं। हमला भारतीय समयानुसार रविवार सुबह 4:30 बजे हुआ।

ट्रम्प ने ईरान पर हमले के 3 घंटे बाद देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ईरान की अहम न्यूक्लियर साइट्स ‘obliterate’ यानी कि पूरी तरह से तबाह कर दी गई हैं। फोर्डो पर बमों की एक पूरी खेप गिरा दी गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि अब उसे शांति कायम करना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो उस पर और बड़े हमले किए जाएंगे।

अमेरिका के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइलें दागीं हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उन्होंने इजराइल पर सबसे बड़ा अटैक किया है। इसके तहत इजराइल के 14 अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक हाइफा और तेल अवीव के मिलिट्री और रिहायशी ठिकानों पर ईरानी मिसाइलें गिरी हैं। इजराइल में अब तक 23 लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है।

इजराइल-ईरान के बीच जारी संघर्ष का आज 10वां दिन है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान में 13 जून से अब तक 657 लोगों की मौत हुई है और 2000 से ज्यादा घायल हैं।

हालांकि, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सिर्फ 430 नागरिक के मारे जाने और 3,500 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। वहीं, इजराइल में 21 जून तक 24 लोग मारे गए हैं, जबकि 900 से ज्यादा घायल हुए हैं।

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले में इजराइल के सेंटर और नॉर्थ के इलाकों में 23 लोग घायल हुए हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक तेल अवीव के इचिलोव मेडिकल सेंटर ने बताया कि 5 लोगों को अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया है। इनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।

इजराइली सेना (IDF) ने ईरान के पश्चिमी हिस्से में नए हवाई हमले किए हैं। IDF के मुताबिक, ये हमले उन मिसाइल लॉन्चर्स पर किए गए जो आज कुछ देर पहले इजराइल पर हमले में इस्तेमाल हुए थे। इन लॉन्चर्स को तबाह कर दिया गया है।

इसके अलावा इजराइली वायुसेना (IAF) ने कुछ और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर्स को भी निशाना बनाया जो लॉन्च के लिए तैयार थे। इन हमलों में कई ईरानी सैनिकों को भी मार गिराया गया है।

ईरान ने एक व्यक्ति को इजराइल की जासूसी एजेंसी मोसाद के लिए काम करने के आरोप में फांसी दी है।टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक मारे गए शख्स का नाम माजिद मोसयेबी है।

ईरान की अदालत ने कहा कि वह इजराइल को खुफिया जानकारी देने की कोशिश कर रहा था। सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे शनिवार सुबह फांसी दी गई।

इजराइली सेना ने कहा है कि अब नागरिक अपने सुरक्षित बंकरों से बाहर निकल सकते हैं। ईरानी मिसाइलों को मार गिरा दिया गया है। सेना के मुताबिक, ईरान ने दो चरणों में कुल 27 मिसाइलें दागीं। पहले हमले में 22 और दूसरे में 5 मिसाइलें शामिल थीं।

इन मिसाइलों का असर तेल अवीव, हाइफा और बाकी शहरों में देखा गया। सेना ने कहा कि हालात अब कंट्रोल में हैं और आम जनता के लिए बाहर निकलना सुरक्षित है।

मिसाइल हमले के बीच साइप्रस में फंसे हुए 1,800 इजराइली नागरिकों को वापस ला रहा एक क्रूज जहाज इजराइली पोर्ट में एंट्री नहीं कर पाया।

इजराइल की ‘होम फ्रंट कमांड’ ने निर्देश दिया कि सुरक्षा कारणों से अशदोद पोर्ट को फिलहाल बंद रखा जाए। कंपनी ने यात्रियों को बताया है कि जहाज पोर्ट के पास ही रुका है। जिन यात्रियों को आज साइप्रस रवाना होना था, उन्हें भी जानकारी दी गई है।

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले में इजराइल के सेंटर और नॉर्थ के इलाकों में 16 लोग घायल हुए हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक तेल अवीव के इचिलोव मेडिकल सेंटर ने बताया कि 5 लोगों को अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया है। इनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।

इजराइल की प्रमुख मेडिकल राहत संस्था ने बताया है कि उनकी टीमें देशभर में 10 से अधिक जगहों पर मिसाइल और उसके टुकड़ों के गिरने की घटनाओं पर राहत कार्य कर रही हैं।

संस्था ने कहा कि मिसाइल हमलों से कई जगहों पर नुकसान हुआ है और बचाव टीमें घायलों की मदद के लिए तेजी से काम कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हैं और हालात पर नजर रखी जा रही है।

ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता जनरल मोहम्मद अली नाइनी ने दावा किया है कि ईरान ने इजराइल के 14 ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें हाइफा और तेल अवीव के अहम सैन्य और तकनीकी केंद्र शामिल हैं।

नाइनी ने इसे अब तक की सबसे सफल जवाबी कार्रवाई बताया। उनके मुताबिक, हाइफा के सेंट्रल इलाके में स्थित ‘सैल टावर’ को लंबी दूरी की कद्र-एफ मिसाइल से निशाना बनाया गया। यहां पर इजराइल की AI21 लैब्स और अन्य मिलिट्री सॉफ्टवेयर कंपनियां थीं।

इसके अलावा हेदेरा पावर प्लांट, हैफा की तेल रिफाइनरी, ओवदा एयरबेस, इजराइल का साइबर कमांड, किर्यात गत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री और राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया।

ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल इजराइल के हाइफ़ा शहर में गिर गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि शहर में सायरन नहीं बजा।

इजराइली सेना के होम फ्रंट कमांड ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है कि आखिर अलर्ट सिस्टम क्यों फेल हुआ। फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।

अमेरिका के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमला शुरू कर दिया है। इजराइली सेना ने रविवार सुबह बताया कि कुछ देर पहले ईरान से इजराइल की ओर मिसाइलें छोड़ी गईं हैं। डिफेंस सिस्टम उन्हें रोकने के लिए एक्टिव हो चुकी हैं।

सेना ने जनता से अपील की है कि वे तुरंत सुरक्षित स्थान (शेल्टर) में जाएं और अगली सूचना तक वहीं रहें। यह मिसाइल हमला अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से पहली बड़ा रिएक्शन माना जा रहा है।

सऊदी अरब ने कहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान की परमाणु साइटों पर किए गए हवाई हमलों के बाद गल्फ इलाके में किसी भी तरह के विकिरण का असर नहीं देखा गया है।

सऊदी अरब के परमाणु और रेडियोलॉजिकल रेगुलेटरी कमीशन ने एक्स पर दिए गए एक बयान में यह जानकारी दी।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अमेरिका के हमलों पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा का अधिकार हमारे पास है और ईरान अपने लोगों, संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए हर विकल्प अपनाएगा।

अराकची ने कहा कि अमेरिका खुद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। उसने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों पर हमला कर गंभीर अंतरराष्ट्रीय कानून, UN चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा, “आज सुबह जो हुआ वह बेहद खतरनाक, अवैध और आपराधिक है। इसका असर हमेशा के लिए रहेगा। दुनिया के हर देश को इस पर चिंता होनी चाहिए।”

अमेरिका ने इस्फहान और नतांज में 30 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी हैं। इन्हें 400 मील (643 किमी) दूर अमेरिकी पनडुब्बियों से लॉन्च किया गया था।

फॉक्स न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी सेना ने फोर्डो में न्यूक्लियर साइट पर 5 से 6 B2 बॉम्बर से GBU-57 बम गिराए हैं। पहले यह अनुमान लगाया गया था कि फोर्डो न्यूक्लियर साइट को तबाह करने के लिए दो बंकर बस्टर की जरूरत पड़ेगी।

हमास ने ईरान में अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे ‘खुला हमला’ बताया है। अपने बयान में हमास ने कहा कि ये हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। इससे दुनिया की शांति और स्थिरता को सीधा खतरा है।

ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था (AEOI) ने कहा है कि अमेरिका के मिसाइल हमलों के बाद भी फोर्डो, नतांज और इस्फहान में कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ है। एजेंसी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इलाके की जांच और रेडिएशन मापने वाली मशीनों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक इन जगहों के आसपास रहने वालों के लिए कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि इन स्थलों की सुरक्षा अब भी सामान्य और स्थिर है।

इजराइल में रविवार से स्कूल, दफ्तर, भीड़-भाड़ वाली जगहों के अलावा सभी आयोजनों पर रोक लगा दी गई है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज की मंजूरी और हालात की समीक्षा के बाद यह फैसला किया गया है।

इजराइल की होम फ्रंट कमांड की हिदायतों के मुताबिक अब देशभर में सिर्फ जरूरी कामों की इजाजत होगी। इसका मतलब है कि जरूरी जगहों को छोड़कर स्कूल, दफ्तर, भीड़-भाड़ वाली जगहें और कार्यक्रम बंद रहेंगे या उन पर रोक लगी रहेगी।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे होम फ्रंट कमांड के आधिकारिक चैनलों, राष्ट्रीय आपातकालीन पोर्टल और मोबाइल ऐप पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और उनका पालन करें।

ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था (AEOI) ने परमाणु ठिकानों पर किए गए अमेरिकी हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का उल्लंघन बताया है। मेहर न्यूज के मुताबिक एजेंसी ने बयान में कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होने के बावजूद किया गया। इसमें एजेंसी की चुप्पी या सहयोग भी शामिल था।

ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था (AEOI) ने कहा कि अमेरिका ने खुद राष्ट्रपति ट्रम्प के जरिए इन हमलों की जिम्मेदारी ली है, जबकि ये ठिकाने IAEA की निगरानी में थे, और किसी भी तरह के समझौते का उल्लंघन नहीं कर रहे थे। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह ‘जंगल के कानून’ जैसी कार्रवाई की निंदा करे और ईरान को उसके वैध अधिकार दिलाने में समर्थन दे।

AEOI ने ईरानी जनता को भरोसा दिलाया कि दुश्मनों की कोशिशों के बावजूद, हजारों वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मेहनत से ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाता रहेगा और इसे कोई रोक नहीं सकेगा।

एबीसी न्यूज ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका और इजराइल ने करीब 1 साल पहले ईरान पर मिसाइल हमले की प्रैक्टिस की थी। यह ईरान पर हमला करने से जुड़ा किसी तरह का पहला अभ्यास था। ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद तेल अवीव में हाई अलर्ट है। वहां पर सुबह होने के बावजूद भी बहुत कम चहल-पहल देखी जा रही है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई की संभावनाओं को देखते हुए तेल अवीव में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इजराइल की जनता को संबोधित किया है। नेतन्याहू ने कहा कि ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ में उनकी सरकार ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है और ईरान के परमाणु ठिकानों को खत्म करने का जनता से किया वादा पूरा किया।

नेतन्याहू ने कहा कि ये हमले अमेरिका और इजराइल ने मिलकर किया। इसका मकसद ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना था। नेतन्याहू ने बताया कि हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें फोन कर बधाई दी।

नेतन्याहू ने ट्रम्प को स्वतंत्र दुनिया का साहसी नेता और इजराइल का सबसे बड़ा दोस्त बताया। उन्होंने कहा, ‘पूरे यहूदी समुदाय और इजराइली नागरिकों की ओर से मैं उनका आभार प्रकट करता हूं।’

संयुक्त राष्ट्र ने इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष पर अपनी चिंता जताई है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि हालात बहुत खतरनाक हो गए हैं और अब यह जंग तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकती है, जिसका बहुत बुरा असर आम लोगों, पूरे इलाके और दुनिया पर पड़ेगा।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस संकट की घड़ी में जरूरी है कि हम अराजकता और तबाही के इस सिलसिले को रोकें। उन्होंने कहा कि इस हालात का कोई सैन्य समाधान नहीं है। आगे बढ़ने का रास्ता सिर्फ बातचीत और शांति है।

ट्रम्प ने कहा- मैंने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा ईरान सिर्फ इजराइल के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी खतरा है।

ईरान पिछले 40 सालों से अमेरिका और इजराइल के खात्मे की बात करता रहा है। अगर ईरान शांति कायम नहीं करता तो इससे भी बड़ा हमला होगा। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट के दबंग को अब शांति बनानी चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि हमलों का मकसद ‘ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना और दुनिया में परमाणु खतरे से बचाना’ था। आज रात मैं दुनिया को बता सकता हूं कि यह हमला एक शानदार सैन्य सफलता थी।

ट्रम्प जब देश को संबोधित कर रहे थे, तब उनके पीछे उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ मौजूद थे।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बधाई दी है। यह बधाई अमेरिका द्वारा ईरान के अंदर परमाणु ठिकानों पर बम गिराने के बाद दी गई।

नेतन्याहू बोले- धन्यवाद राष्ट्रपति ट्रम्प, आपका ईरान के अंदर परमाणु ठिकानों पर हमला करने का कड़ा कदम उठाया है। यह इतिहास बदल देगा।

उन्होंने कहा कि इजराइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ के तहत ईरान पर कई असरदार हमले किए, लेकिन अमेरिका का हमला ‘वास्तव में बेजोड़’ था। नेतन्याहू ने कहा कि दुनिया में कोई और देश ऐसा नहीं कर सकता जो अमेरिका ने आज रात किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने दुनिया के सबसे खतरनाक शासन को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों से दूर रखने के लिए जरूरी कदम उठाया।

ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) कुछ ही मिनटों में अमेरिकी हमलों को लेकर बयान जारी करेगा। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRIB चैनल के मुताबिक अमेरिकी हमलों में फोर्टो न्यूक्लियर साइट की एंट्री और एग्जिट गेट को नुकसान पहुंचा है।

फॉक्स न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी सेना ने फोर्डो में न्यूक्लियर साइट पर 5 से 6 B2 बॉम्बर यानी कि बंकर तोड़ बम गिराए हैं। पहले यह अनुमान लगाया गया था कि फोर्डो न्यूक्लियर साइट को तबाह करने के लिए दो बंकर बस्टर की जरूरत पड़ेगी।

वहीं, इस्फहान और नतांज में 30 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी हैं। इन्हें 400 मील दूर अमेरिकी पनडुब्बियों से लॉन्च किया गया था।

हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बातचीत हुई। CNN ने व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों के हवाले से इसकी जानकारी दी है।

ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले को लेकर यमन के हूती विद्रोहियों ने नाराजगी जताई है। हूती विद्रोहियों के नेता मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि अमेरिकी बमबारी जंग का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब ‘हिट एंड रन’ का वक्त जा चुका है।

ईरान की मेहर न्यूज के मुताबिक ईरानी सेना ने अमेरिकी हमलों को रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद वे हमला रोकने में नाकामयाब रहे। उन्होंने कहा कि फोर्डो न्यूक्लियर साइट के एक हिस्से पर हमला हुआ।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRIB के मुताबिक ईरान ने हमले से कुछ समय पहले ही तीनों न्यूक्लियर साइट्स खाली कर दिए थे। हालांकि इन तीनों जगह पर हमले के बाद कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

इस्फहान के सुरक्षा मामलों के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि इस्फहान और नतांज दोनों जगहों पर एक ही वक्त हमले हुए। इस दौरान कई विस्फोट सुने गए।

CNN ने सूत्रों के हवाले से बताया कि फिलहाल ट्रम्प की ईरान में और सैन्य कार्रवाई की कोई योजना नहीं है।

ट्रम्प का मानना है कि कूटनीति ठप पड़ने के बाद ईरान के सशक्त परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना जरूरी हो गया था।

उन्होंने यह फैसला बीते कुछ दिनों में हालात की गंभीरता को देखते हुए लिया।हालांकि, अमेरिका ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है, लेकिन ट्रम्प चाहते हैं कि ईरानी नेता इस युद्ध को खत्म करने पर सहमत हों और आगे बातचीत का रास्ता खुले।

ट्रम्प की तरफ से ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले की घोषणा के बाद देश के सांसदों में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है। कई रिपब्लिकन नेताओं ने ट्रम्प की तारीफ की है, तो वहीं कुछ डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों ने इस फैसले को असंवैधानिक और खतरनाक बताया है।

रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी (केंटकी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “यह संविधान के खिलाफ है।”
डेमोक्रेट सांसद सारा जैकब्स (कैलिफोर्निया) ने कहा, “ट्रम्प का ईरान पर हमला असंवैधानिक है और यह अमेरिका को एक और अंतहीन युद्ध की ओर धकेल सकता है।”

रिपब्लिकन सांसद एंडी हैरिस (मैरीलैंड) ने इसे “शक्ति के माध्यम से शांति” कहा। उन्होंने लिखा, “परमाणु हथियारों से लैस ईरान अमेरिका, इजरायल और पूरे स्वतंत्र विश्व के लिए खतरा है।”
रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन (नेब्रास्का) ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका की रक्षा कर रहे हैं।”
सीनेटर लिंडसे ग्राहम (साउथ कैरोलिना) ने हमले को “सही फैसला” बताया और अमेरिकी वायुसेना की तारीफ की।

ईरान के फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर हमले के बाद इजराइल के पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का ‘कड़ा फैसला’ है। अब दुनिया ज्यादा सुरक्षित हो गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें लिखा है फोर्डो खत्म हुआ।

फोर्डो एनरिचमेंट प्लांट ईरान की एक पहाड़ी में 295 फीट, यानी लगभग 90 मीटर गहराई में मौजूद है।

इसकी बनावट और रणनीतिक लोकेशन ऐसी है कि कोई भी देश इसे हवाई हमले से आसानी से तबाह नही कर सकता था। फोर्डो के अड्डे तक पहुंचने के लिए पांच सुरंगों को काटकर गहराई में बंकरनुमा सुविधाएं बनाई गई हैं।

इसका कंट्रोल परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) के पास है। ये नतांज के बाद ईरान का दूसरा यूरेनियम प्यूरिफिकेशन प्लांट है। इजराइल लंबे समय से इस अड्डे को खत्म करना चाहता था।

इसे तबाह करने में सिर्फ अमेरिका के GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बंकर-बस्टर बम और B-2 स्टेल्थ विमान सक्षम हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब इन्हीं विमानों से अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है।

अमेरिका ने ईरान में 3 परमाणु ठिकानों पर हमला किया है। इसमें फोर्डो, नतांज और एस्फाहान शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सभी अमेरिकी प्लेन ईरान के हवाई इलाके से बाहर निकल चुके हैं।ट्रम्प ने कहा कि फोर्डो पर बमों का पूरा पेलोड गिराया गया। सभी विमान सुरक्षित रूप से अपने घर की ओर जा रहे हैं। हमारे महान अमेरिकी योद्धाओं को बधाई। दुनिया में कोई और सेना नहीं है जो ऐसा कर सकती थी। अब शांति का समय है।

इजराइली अधिकारियों ने ट्रम्प प्रशासन को साफ कर दिया है कि वे ईरान के फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर कार्रवाई के लिए दो हफ्तों का इंतजार नहीं करेंगे। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इजराइल अमेरिका की मदद के बिना भी इस परमाणु ठिकाने पर हमला कर सकता है।

गुरुवार को इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और सैन्य प्रमुख एयाल जामीर ने ट्रम्प प्रशासन के साथ एक फोन कॉल के दौरान यह बात कही।

इजराइल का कहना है कि ईरान को न्यूक्लियर डील के लिए दो हफ्तों का वक्त देना बहुत ज्यादा है। कार्रवाई तुरंत होनी चाहिए।

फोर्डो साइट पहाड़ के अंदर 200 फीट की गहराई में मौजूद है। इसे नष्ट करने के लिए अमेरिका के पास ही ऐसे बम हैं जो इतनी गहराई तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, इजराइल अब बिना अमेरिकी मदद के भी कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

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