केंद्र सरकार ने संसद के आगामी सत्र को शांतिपूर्ण और सुचारू तरीके से चलाने के उद्देश्य से 30 नवंबर को एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। संसद का सत्र शुरू होने से पहले ऐसी बैठकों का आयोजन इसलिए किया जाता है ताकि सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे के विचार समझ सकें और सत्र में अनावश्यक टकराव को कम किया जा सके। इस बार भी सरकार चाहती है कि सत्र अधिक उत्पादक हो और कानून, नीतियों व जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अच्छी चर्चा हो।
इस बैठक की अगुवाई संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू करेंगे। कुछ परिस्थितियों में बैठक का नेतृत्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कर सकते हैं। बैठक में सरकार सत्र का पूरा एजेंडा सभी राजनीतिक दलों को बताएगी यानी कौन-कौन से बिल पेश किए जाएंगे, किन विषयों पर चर्चा होनी है और सरकार किन मुद्दों को प्राथमिकता देना चाहती है। इसके साथ ही विपक्षी दलों को भी अपना पक्ष रखने और अपनी चिंताएं बताने का पूरा अवसर मिलेगा। पिछले कुछ संसद सत्रों में कई बार ऐसा देखा गया है कि सरकार और विपक्ष के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि कुछ बिल बिना चर्चा के पास हो गए और कुछ मुद्दों पर बहस ठीक से नहीं हो पाई। इससे संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और जनता से जुड़े कई सवालों को उतनी गंभीरता नहीं मिल सकी, जितनी जरूरत थी। इसलिए इस बार सरकार पहले से तैयारी करना चाहती है ताकि सत्र में कम से कम विवाद हो और ज्यादा से ज्यादा काम हो सके।
विपक्ष की तरफ से भी कई मुद्दे हैं, जिन्हें वे सत्र में उठाना चाहते हैं। इनमें महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक चुनौतियाँ, किसानों की समस्याएँ, सीमाई सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरी बातें शामिल हैं। विपक्ष पहले भी कहता रहा है कि सरकार पर्याप्त चर्चा की अनुमति नहीं देती और अचानक बिल पेश कर देती है। सर्वदलीय बैठक में विपक्ष यह मांग उठा सकता है कि सत्र में सभी महत्वपूर्ण विषयों पर खुले और समयबद्ध तरीके से चर्चा कराई जाए। यह बैठक संसद के वातावरण को सकारात्मक बनाने में मदद कर सकती है। भले ही हर मुद्दे पर सहमति बनना मुश्किल है, लेकिन कम से कम बातचीत का माहौल तैयार हो जाता है। अगर सरकार और विपक्ष कुछ मुद्दों पर आपसी समझ बना लें, तो सत्र में अनावश्यक शोर-शराबा कम होगा और कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि संसद का यह सत्र रचनात्मक हो। कई अहम विधेयक और नीतिगत फैसले लाइन में हैं, जिन पर जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। इसलिए सरकार नहीं चाहती कि बार-बार हंगामे की वजह से काम रुके। इसी कारण वह सभी दलों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है। कुल मिलाकर, 30 नवंबर की यह सर्वदलीय बैठक आने वाले सत्र की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होगी। यदि यह बैठक सकारात्मक माहौल तैयार करने में सफल रहती है, तो संसद की उत्पादकता बढ़ने की पूरी संभावना है। इससे न केवल सरकार, बल्कि विपक्ष और खासकर आम जनता को फायदा होगा, क्योंकि जनता के मुद्दों पर ज्यादा चर्चा होगी और कई जरूरी फैसले समय पर लिए जा सकेंगे।