लखनऊ : समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को सपा कार्यालय में प्रेसवार्ता की इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने कहा, अगर गोरखपुर वालों ने अपना मुंह खोलकर यहां के राज खोल दिए तो वहां विरासत गलियारा की जगह हिरासत गलियारा बनवाना पड़ेगा। अयोध्या और प्रयागराज में भाजपा लोकसभा सीटें हार गई और बनारस में हारते-हारते बची है। अब अगला नंबर गोरखपुर और मथुरा का है।
सपा प्रमुख ने कहा, गोरखपुर के लोग जानते हैं कि वहां गोरखधंधा चल रहा है। अगर गोरखपुर की सच्चाई सामने आ जाए, तो वहां विरासत का नहीं, हिरासत का गलियारा बनाना पड़ेगा। गलियारे में मुआवजा सहमति से नहीं, बल्कि बाजार मूल्य के अनुसार दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, सरकार शासन-प्रशासन के दबाव में व्यापारियों और लोगों से जबरन सहमति दिलवा रही है। सरकार डर दिखाकर सहमति पत्र जारी करवा रही। हमारी मांग है कि सहमति डराकर या धमकाकर नहीं, बल्कि बाजार दर पर मुआवजा देकर ली जाए।
दरअसल, योगी सरकार गोरखपुर में 3.5 किमी लंबा गलियारा बना रही है। PWD सूत्रों के अनुसार, इस गलियारे के लिए 833 लोगों के मकान तोड़े जाएंगे। गलियारे बनाने के खिलाफ 25 जून को लखनऊ से सपा डेलीगेशन गोरखपुर पहुंचा था। इस दौरान बीजेपी और सपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई थी। कुछ लोगों ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और सपा नेताओं पर अंडे फेंके, जो उनकी गाड़ियों पर गिरे थे।
जानिए अखिलेश यादव ने और क्या कहा ?
पता नहीं भाजपा को क्या हो गया है। जहां भी जमीन दिखाई दे रही है। वहां भाजपा के लोग कब्जा करने में लग जाते हैं। यह एक शहर की कहानी नहीं है। हर शहर में अगर कहीं जमीन है और भाजपा की नजर उस पर पड़ गई, तो वे शासन-प्रशासन की मदद से किसी न किसी तरीके से कब्जा करने लगते हैं।
मैं नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने गोरखपुर के लोगों की आवाज उठाई। हमारे नेता प्रतिपक्ष को रोकने के लिए बुलडोजर लगाया गया। पुलिस-प्रशासन सहयोग कर रहा था। कहीं न कहीं समन्वय चल रहा था। विरासत को गलियारा बना रहे हैं, जब कि उनके पास आखिरी बजट बचा है।
सच्चाई यह है कि अगर गोरखपुर के लिए काम करना था, तो पहली घोषणा याद रखनी चाहिए थी। सीएम योगी ने झांसी में कहा था, गोरखपुर और झांसी में मेट्रो बनाएंगे। आज दिल्ली सरकार के 11 और प्रदेश सरकार के 9 साल हो गए। न तो झांसी में मेट्रो बनी, न ही गोरखपुर में।
भाजपा के लोग किसी के सगे नहीं हैं। केवल गोरखपुर में ही नहीं, बल्कि लखनऊ में भी गोरखधंधा चल रहा है। उनके सलाहकार को हटाना पड़ा, पीछे किससे हाथ मिलाया था? वह भारत में हैं या छोड़कर चले गए? वहां ऐसे लोग बैठे हैं, जो जमीन का काम कर रहे हैं।
अपने गांव या उसके आसपास ही बैठकर यही कार्यक्रम चल रहा है। यह तो गोरखपुर के लोग जानते होंगे कि सबसे ज्यादा रजिस्ट्री किसके नाम पर है। कई सौ एकड़ जमीन छीनी जा चुकी है। पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार का खुलासा करने का दावा करते हैं। मगर उन्हें अपनी नाक के नीचे गोरखधंधा दिखाई नहीं दे रहा है, क्योंकि उसमें खुद या उनके करीबी शामिल हैं।
उन्हें जमीन के साथ-साथ सोने से भी प्यार है। सिसोदिया नर्सिंग कॉलेज में भी गोरखधंधा हुआ है। सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री ने अपने गृह जनपद जाने का रिकॉर्ड बनाया होगा। शायद ही कोई सीएम अपने गृह जनपद इतना गया हो, जितना ये गए हैं। वहां जनता दरबार लगता है, जनता की सुनवाई होती है। इसके बावजूद 17 साल की नाबालिग युवती के साथ रेप हुआ। भाजपा के बेहद करीबी एक व्यक्ति ने इस घटना को अंजाम दिया।
भाजपा के लोग हिटलर की याद दिला रहे हैं। हिटलर भी अपने लोगों को पुलिस की वर्दी में भेजता था, जो अन्याय का प्रतीक है। कोर्ट भी कह रहा है कि बुलडोजर अन्याय का प्रतीक बनता जा रहा। आज के समय में बुलडोजर ने नेता प्रतिपक्ष को रोका, लेकिन सपा कार्यकर्ता न तो बुलडोजर से डरे, न ही काले झंडों से।
हम विश्वास दिलाते हैं कि सपा सरकार आई तो गोरखपुर में फर्जी गलियारे की जगह विकास का गलियारा बनाएंगे। गोरखपुर में जो कारखाने चल रहे हैं, वे सपा की देन हैं। सुनने में आया है कि लखनऊ में कई तालाब कब्जा कर लिए गए हैं। सैटेलाइट मैप में 2017 में जो तालाब दिख रहे थे, उन्हें खत्म कर दिया गया।
सैटेलाइट मैप के लिए अमेरिका जाना पड़ेगा। यहां तो गोरखधंधा चल सकता है, लेकिन अमेरिका में नहीं चलेगा। जौनपुर में 60 दिनों में 26 हत्याएं हुई हैं। जब सरकार जमीन छीनने में लगी है, तो कानून-व्यवस्था पर कौन ध्यान देगा?
जिस समय भाजपा का गठन हुआ था, उस वक्त हमारे मुख्यमंत्री भाजपा के सदस्य नहीं थे। वे केवल चुनाव चिह्न पाने के लिए सदस्य बने। भाजपा के गठन के समय भी बहस थी कि हम कौन-सा रास्ता अपनाएंगे। मुंबई अधिवेशन में यह प्रस्ताव पास हुआ था कि भाजपा का रास्ता सेक्युलर और सोशलिस्ट होगा।
जब देश पूंजीवादी (कैपिटलिस्ट) होगा, तो गरीबों को कुछ नहीं मिलेगा। भाजपा को समाजवाद नहीं चाहिए। जब मुख्यमंत्री अपने ही जिले में लाभ नहीं दिला पा रहे हैं, तो बाकी प्रदेश की जनता को क्या लाभ मिलेगा?
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने क्या कहा ?
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा- जब वह गोरखपुर जा रहे थे, तो वहां भाजपा के विधायक और एमएलसी बुलडोजर लेकर खड़े थे कि आपको जाने नहीं देंगे। हमारे साथ धक्का-मुक्की और नारेबाजी की गई। हमारे साथी राहुल यादव और विकास यादव की गाड़ी को तोड़ दिया गया। पुलिस ने कहा कि आप इस रास्ते से न जाएं, रास्ता बदल लें।
हमने तय किया कि हम उसी रास्ते से जाएंगे। हमारे साथ लगातार धक्का-मुक्की होती रही। पुलिस ने रास्ता साफ कराकर हमें जाने दिया। हम एक-एक व्यापारी से मिले। एक व्यापारी ने बताया कि हमने 50 लाख रुपए में घर लिया। लेकिन मुआवजा केवल 50 हजार मिल रहा। दो दुकानदारों ने बताया कि हमारी दुकान अधिग्रहण में चली जाएगी, अब हम क्या करेंगे।
घंटाघर से आगे जटाशंकर चौराहे पर हमारे खिलाफ भीड़ इकट्ठा कर दी गई थी। मेरी गाड़ी के बोनट पर चढ़कर गंदे नारे लगाए गए। हम पर ईंट और अंडे फेंके गए। काले झंडे और काले छाते दिखाए जा रहे थे। हमने कभी नहीं देखा कि विपक्ष के लोगों को काला झंडा दिखाया जाए। यह गोरखपुर में एक नई परंपरा है। लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।
अखिलेश ने चंदौली के रिटायर्ड शिक्षक को भी लखनऊ बुलाया
अखिलेश ने चंदौली के रिटायर्ड शिक्षक को भी लखनऊ बुलाया था। विद्याधर ने कहा- चंदौली में बंदरगाह के नाम पर जमीन हड़पी जा रही है। गंगा के किनारे बंदरगाह बनाया गया है, लेकिन गंगा में पानी नहीं है। बंदरगाह फेल हो गया है। एक भी जहाज नहीं आ रहा है। वहां के चार गांवों की जमीन जबरन ली जा रही है। जहां बंदरगाह बना है, वह बनारस जिले में है। बनारस का सर्किल रेट ज्यादा है, मिर्जापुर का कम है।
किसान जमीन देने को तैयार नहीं हैं। गांव में चारदीवारी बनाई जा रही है। हमने एसडीएम से कहा- हमारे ऊपर गोली चला दीजिए, लेकिन हम जमीन नहीं देंगे। वहां का सर्किल रेट 15 लाख प्रति बिस्वा है, सरकार 4 लाख रुपए प्रति बिस्वा दे रही है। आधी जमीन को ‘गैर-मुमकिन’ दर्शाकर उसे हड़पने का प्रयास किया जा रहा। हम जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे।