उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के आगामी जापान दौरे को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने तीखा तंज कसा है। इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री के दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि जब योगी आदित्यनाथ जापान जा ही रहे हैं, तो उन्हें क्योटो भी जरूर जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को क्योटो जैसा विकसित क्यों नहीं बनाया जा सका। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जापान से शहरों के संरक्षण और विकास के बारे में सकारात्मक सीख लेकर आना चाहिए।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में 2027 के विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने अंतिम वर्षों में है और ऐसे में इस तरह के विदेशी दौरे का व्यावहारिक फायदा कितना होगा, यह सवाल खड़ा होता है। उनके अनुसार, इतने कम समय में न तो कोई बड़ी योजना तैयार हो सकती है और न ही उसे जमीन पर उतारा जा सकता है। उन्होंने इस दौरे को “मनसुख-पर्यटन” करार देते हुए तंज कसा कि अगर सरकार इसे स्वीकार कर ले, तो कम से कम सच्चाई बोलने के लिए याद रखी जाएगी।
इसके अलावा उन्होंने एक और टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इस दौरे से मिलने वाले अनुभवों का फायदा केवल व्यक्तिगत स्तर तक ही सीमित रखेंगे या उसे जनता और प्रशासन के साथ भी साझा करेंगे। इस तरह उन्होंने सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 फरवरी को सिंगापुर और जापान की यात्रा पर रवाना होंगे। यह दौरा निवेश को बढ़ावा देने और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
23 और 24 फरवरी को मुख्यमंत्री सिंगापुर में विभिन्न बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है।
इसके बाद 25 और 26 फरवरी को उनका कार्यक्रम जापान में निर्धारित है। जापान में मुख्यमंत्री कई औद्योगिक और तकनीकी संस्थानों के साथ बातचीत करेंगे। इस दौरे को राज्य में आधुनिक तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस यात्रा का एक खास आकर्षण जापान की अत्याधुनिक मैग्लेव ट्रेन का अनुभव होगा। यह ट्रेन चुंबकीय तकनीक पर आधारित है और बिना पटरी को छुए हवा में चलती है। मुख्यमंत्री इस ट्रेन में लगभग 100 किलोमीटर की यात्रा करेंगे, जिसमें 50 किलोमीटर का सफर आगे और 50 किलोमीटर वापसी का होगा।
सरकार का मानना है कि इस तरह की तकनीक को समझना उत्तर प्रदेश के भविष्य के परिवहन ढांचे के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। खासतौर पर हाईस्पीड रेल और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को विकसित करने के लिए यह अनुभव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक तरफ जहां सरकार इस दौरे को विकास और निवेश के नजरिए से अहम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक और प्रतीकात्मक कदम के रूप में देख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह दौरा वास्तव में प्रदेश के विकास में कितना योगदान देता है और क्या इससे कोई ठोस नतीजे सामने आते हैं।