जिले के नुमाइश ग्राउंड में आयोजित कृषि मेला इस बार किसानों के लिए खास आकर्षण बना रहा। आधुनिक कृषि तकनीक, नई फसल किस्मों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को किसानों तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित इस मेले में प्रदेश के आठ जिलों से 1200 से अधिक किसानों ने भाग लिया। मेले में तीन प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक भी शामिल हुए, जिन्होंने किसानों को नवीनतम कृषि अनुसंधान और तकनीकों की जानकारी दी।
मेले का उद्घाटन कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने किया। उन्होंने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा कि आज के समय में खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने के लिए किसानों का आधुनिक तकनीक से जुड़ना बेहद आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाए, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन संभव हो सके।
कार्यक्रम में किसानों के लिए कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें फसल सुरक्षा, मृदा परीक्षण, जल प्रबंधन, जैविक खेती, उन्नत बीज, सब्जी उत्पादन, फल-सब्जी संरक्षण और ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि किस तरह सही समय पर सही तकनीक अपनाकर वे अपनी फसलों का उत्पादन दुगुना कर सकते हैं।
मेले में उपस्थित विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों का जवाब दिया और उन्हें उनकी जमीन की गुणवत्ता, फसल चयन, उर्वरक उपयोग और फसल सुरक्षा के बारे में व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी दिया। उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों और बदलते जलवायु पैटर्न के चलते किस तरह की फसलें लगाना अधिक उचित रहेगा।
कृषि राज्य मंत्री औलख ने कहा कि सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना है। मंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
मेले में कई आधुनिक कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। किसानों ने नए ट्रैक्टर मॉडल, पावर टिलर, मल्टी-क्रॉप थ्रेशर, कटाई मशीनें, स्प्रेयर, ड्रोन आधारित फसल स्प्रे तकनीक और स्मार्ट सिंचाई उपकरणों को करीब से देखा और उनके उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त की। कई किसानों ने कहा कि इस तरह के मेले उन्हें नई तकनीकों को समझने और खेती में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मेले में एक विशेष स्टॉल जैविक खेती पर भी लगाया गया था, जहाँ विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह कम लागत में प्राकृतिक तरीके से खेती की जा सकती है। किसानों को यह जानकारी दी गई कि किस प्रकार जैविक खाद, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग करके उपज बढ़ाई जा सकती है और साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता को संरक्षित रखा जा सकता है।
इसके अलावा मेले में जल संरक्षण तकनीकों पर भी जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि लगातार घटते जलस्तर के बीच ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम का उपयोग कैसे किसानों की सिंचाई लागत कम कर सकता है और फसल को सही मात्रा में पानी उपलब्ध करा सकता है।
किसानों ने मेले में आयोजित प्रदर्शनी और तकनीकी सत्रों की सराहना की। कई किसानों ने कहा कि उन्हें यहां व्यावहारिक जानकारी मिली है, जिसे वे अपने खेतों में लागू करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं ताकि वे खेती में आने वाली नई तकनीकों से अपडेट रह सकें।
कार्यक्रम के अंत में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने सभी किसानों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों को धन्यवाद दिया और आश्वासन दिया कि सरकार किसानों को आधुनिक खेती के लिए सभी संभव सहयोग देती रहेगी।
इस तरह यह कृषि मेला किसानों को नई तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक खेती की दिशा में प्रेरित करने में पूरी तरह सफल रहा।