नोएडा, 18 जनवरी 2026: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में एक निर्माणाधीन इमारत के जल-भराव वाले बेसमेंट में गिरने के बाद 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पुलिस ने परियोजना के दो बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि बिल्डरों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (लापरवाही से मौत) और 304A (लापरवाही से हानिकारक कार्य) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
घटना शनिवार की सुबह हुई जब मृतक युवराज मेहता अपनी कार, मारुति ग्रैंड विटारा, में जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि कार नियंत्रण से बाहर हो गई और सड़क किनारे बनाए गए ड्रेन की सीमा दीवार को तोड़ते हुए निर्माणाधीन बिल्डिंग के जल-भरे बेसमेंट में जा गिरी। इस दुर्घटना के समय क्षेत्र में दृश्यता कम थी, और preliminary जांच में यह संकेत मिले हैं कि तेज गति भी हादसे का कारण बनी।
ग्रेटर नोएडा पुलिस अधीक्षक (ACP) हेमंत उपाध्याय ने बताया कि दुर्घटना के बाद तुरंत राहत कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और फायर विभाग की टीमों को घटनास्थल पर बुलाया। कई घंटे की खोजबीन के बाद, टीम ने युवराज मेहता का शव बेसमेंट से बाहर निकाला।
हालांकि, मृतक के मित्रों ने राहत कार्य में देरी की आलोचना की। उनके अनुसार, बचाव टीमें लगभग 2.30 बजे घटनास्थल पर पहुंची और करीब 3.20 बजे तक पानी में प्रवेश नहीं कर सकीं। मृतक के दोस्तों ने मीडिया से कहा कि यदि राहत कार्य तेज़ी से होता, तो शायद दुर्घटना से तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकती थी।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच में बताया कि बेसमेंट के आसपास की ड्रेन लगभग 6 से 7 फीट चौड़ी थी और वहां पर्याप्त सुरक्षा संकेतक और रोशनी नहीं थे। “कम दृश्यता और उच्च गति के कारण कार चालक नियंत्रण खो बैठा और ड्रेन में जा गिरा,” पुलिस ने कहा।
बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनके कर्तव्य में लापरवाही को ध्यान में रखते हुए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस ने बताया कि FIR में बिल्डरों को सीधे तौर पर लापरवाही और हानिकारक निर्माण गतिविधियों के लिए शामिल किया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन न होना भी हादसे की प्रमुख वजह था।
मृतक युवराज मेहता गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। उनके परिवार और दोस्तों ने इस हादसे पर शोक व्यक्त किया और निर्माणाधीन बिल्डिंग में सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर सवाल उठाए। स्थानीय लोगों ने भी कहा कि कई बार इलाके में सुरक्षा की दृष्टि से चेतावनी दी गई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समय पर कार्रवाई नहीं करते।
ग्रेटर नोएडा प्रशासन ने भी हादसे के बाद घटनास्थल का दौरा किया और निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने का आदेश दिया। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए ड्रेन और बेसमेंट के आसपास सुरक्षा संकेत, पर्याप्त रोशनी और जलभराव की रोकथाम के लिए कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की सुरक्षा और बिल्डरों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन न होना अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनता है। इसके अलावा, सड़क किनारे बने ड्रेन और जलभराव वाले बेसमेंटों के आसपास पर्याप्त चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग नहीं होने से भी दुर्घटनाएं बढ़ती हैं।
ग्रेटर नोएडा पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हादसे के समय क्षेत्र में कम रोशनी और तेज गति ने दुर्घटना को और गंभीर बना दिया। पुलिस अधिकारी हेमंत उपाध्याय ने मीडिया से कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ड्राइविंग नियमों का पालन और निर्माण स्थल पर कड़े सुरक्षा मानकों को लागू करना आवश्यक है।
इस मामले में बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी कहा कि निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की जाएगी। उन्होंने चेताया कि भविष्य में किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
युवराज मेहता के दोस्तों और परिवार ने स्थानीय अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें और भविष्य में सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि अगर सुरक्षा उपाय और चेतावनी संकेत होते, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना टाली जा सकती थी।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के बाद बिल्डिंग और बेसमेंट के आसपास सुरक्षा मानकों और चेतावनी संकेतों की कमी ने हादसे को और गंभीर बना दिया। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा बोर्ड, बैरिकेडिंग, पर्याप्त रोशनी और ड्रेन के आसपास चेतावनी संकेत अनिवार्य किए जाएं।
इस घटना ने न केवल परिवार और मित्रों को शोक में डाल दिया है, बल्कि निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा उपायों की अनदेखी पर भी सवाल उठाए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस बात पर जोर दिया है कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
ग्रेटर नोएडा में यह हादसा सुरक्षा जागरूकता की दिशा में एक चेतावनी भी है। अधिकारियों ने कहा कि निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स और सड़क किनारे बने जलभराव वाले बेसमेंटों में नियमों का पालन अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि बिल्डरों और परियोजना मालिकों की जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है। FIR में शामिल धारा 304 और 304A के तहत बिल्डरों को दोषी मानते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा और नियमों के पालन के महत्व को भी दर्शाता है।
ग्रेटर नोएडा पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे निर्माणाधीन क्षेत्रों में सावधानी बरतें और किसी भी सुरक्षा खामियों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। साथ ही उन्होंने ड्राइविंग के दौरान तेज गति और कम दृश्यता में सतर्क रहने की सलाह दी।