दक्षिण एशिया की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत Tarique Rahman ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली। राजधानी ढाका में आयोजित औपचारिक समारोह में राष्ट्रपति Mohammed Shahabuddin ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के साथ ही देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई और प्रशासनिक बदलावों का दौर शुरू हो गया।
नई सरकार की कैबिनेट संरचना को संतुलित और प्रतिनिधिक बनाने की कोशिश दिखाई दी। मंत्रिपरिषद में विभिन्न सामाजिक और पेशेवर पृष्ठभूमियों के नेताओं को शामिल किया गया है। विशेष रूप से Nitai Roy Chowdhury को कैबिनेट में शामिल किया जाना चर्चा का विषय रहा, क्योंकि वे इस मंत्रिमंडल में एकमात्र हिंदू प्रतिनिधि हैं। इससे सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का संकेत देने की कोशिश की है।
इसके अलावा, अंतरिम प्रशासन से जुड़े अनुभवी अधिकारियों को भी नई व्यवस्था में स्थान मिला है। Khalilur Rahman को टेक्नोक्रैट कोटा के तहत मंत्री बनाया गया है और उन्हें देश का अगला विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है। कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए सरकार पड़ोसी देशों और वैश्विक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने पर ध्यान देने वाली है।
नई सरकार के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं, जिनमें आर्थिक स्थिरता, निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख हैं। हाल के वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक दबावों ने देश की विकास गति को प्रभावित किया था, इसलिए नई नेतृत्व टीम से स्थिर और निर्णायक प्रशासन की अपेक्षा की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह शपथ ग्रहण केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि नीतिगत दिशा में बदलाव का संकेत भी हो सकता है। तारिक रहमान ने अपने शुरुआती संबोधन में आर्थिक सुधार, डिजिटल विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का भी आश्वासन दिया।
शपथ ग्रहण के बाद अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने वादों को किस तरह लागू करती है और जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है। आने वाले महीनों में लिए गए फैसले बांग्लादेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे।