सिर्फ 10 दिन में तैयार होने वाली फसल: माइक्रोग्रीन्स, सेहत और कमाई दोनों का सुपरफूड

Vin News Network
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माइक्रोग्रीन्स: कम समय में उगने वाली पोषण से भरपूर सुपरफूड फसल

खेती की दुनिया में माइक्रोग्रीन्स को सबसे तेज उगने वाली फसलों में गिना जाता है। यह ऐसी फसल है जो बीज बोने के महज 7 से 10 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। पोषक तत्वों से भरपूर माइक्रोग्रीन्स को आज सुपरफूड कहा जाता है, क्योंकि इनमें विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा सामान्य सब्जियों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। यही वजह है कि हेल्थ कॉन्शियस लोग, होटल, रेस्टोरेंट और शहरी उपभोक्ता तेजी से माइक्रोग्रीन्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

माइक्रोग्रीन्स असल में सब्जियों, हर्ब्स या अनाज के छोटे पौधे होते हैं, जिन्हें बहुत शुरुआती अवस्था में काट लिया जाता है। जब बीज अंकुरित होकर पहली असली पत्तियां निकाल लेते हैं और पौधे की ऊंचाई लगभग 2 से 3 इंच हो जाती है, तभी इन्हें काटा जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 7 से 21 दिनों के भीतर पूरी हो जाती है। कम समय, कम जगह और कम लागत में तैयार होने के कारण माइक्रोग्रीन्स शहरी खेती और घर पर उगाने के लिए बेहद उपयुक्त माने जाते हैं।

माइक्रोग्रीन्स उगाने के लिए सही बीजों का चयन सबसे पहला और अहम कदम है। सरसों, मूली, चुकंदर, मेथी, धनिया, सूरजमुखी, मटर, ब्रोकली और पालक जैसे बीज माइक्रोग्रीन्स के लिए बेहद लोकप्रिय हैं। ध्यान रखें कि बीज साफ, रसायन-मुक्त और खासतौर पर माइक्रोग्रीन्स के लिए उपयुक्त हों, ताकि अंकुरण अच्छा हो और फसल सुरक्षित रहे।

उगाने के माध्यम के तौर पर अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी, कोकोपीट या मिट्टी रहित मिश्रण का उपयोग किया जा सकता है। कई लोग केवल पानी आधारित हाइड्रोपोनिक तरीके से भी माइक्रोग्रीन्स उगाते हैं। मिट्टी रहित माध्यम को बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे फफूंदी और रोग लगने का खतरा कम हो जाता है। ट्रे या कंटेनर 2 से 3 इंच गहरे और सपाट होने चाहिए, जिनके नीचे पानी निकलने के लिए छेद हों।

बीज बोने से पहले कुछ बीजों को तैयार करना जरूरी होता है। सूरजमुखी और मटर जैसे बड़े बीजों को 4 से 12 घंटे तक पानी में भिगोने से अंकुरण तेज होता है और पौधे एकसार उगते हैं। वहीं मूली, सरसों और मेथी जैसे छोटे बीजों को सीधे बोया जा सकता है। यह छोटा सा कदम फसल की गुणवत्ता में बड़ा फर्क डालता है।

अब ट्रे तैयार करने की बारी आती है। ट्रे में उगाने का माध्यम भरकर सतह को हल्का समतल कर लें। बीजों को सतह पर समान रूप से फैलाएं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बीज एक-दूसरे पर ज्यादा न चढ़ें। माइक्रोग्रीन्स के बीजों को मिट्टी से ढकने की जरूरत नहीं होती, केवल ऊपर से हल्का पानी का छिड़काव काफी होता है, ताकि बीज और माध्यम नम हो जाएं।

बीज बोने के बाद ट्रे को शुरुआती 2 से 4 दिनों के लिए अंधेरे में रखना जरूरी होता है। इसके लिए ट्रे को किसी अंधेरी जगह पर रखें या दूसरी ट्रे से ढक दें। इस दौरान नमी बनाए रखें। अंधेरे में रखने से पौधे ऊपर की ओर बढ़ते हैं, जिसे एतिओलेशन कहा जाता है। जब लगभग 80 प्रतिशत बीज अंकुरित हो जाएं और छोटे सफेद अंकुर दिखाई देने लगें, तब ट्रे को रोशनी में ले आएं।

रोशनी और पानी का सही प्रबंधन माइक्रोग्रीन्स की सफलता की कुंजी है। ट्रे को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त उज्ज्वल रोशनी मिले, लेकिन सीधी और तेज धूप से बचाव हो। अच्छी रोशनी से पौधों का रंग गहरा हरा होता है और पोषक तत्वों का विकास बेहतर होता है। पानी हमेशा नीचे से दें, ताकि पत्तियां गीली न हों और फफूंदी का खतरा कम रहे। मिट्टी को नम रखें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी न दें।

कटाई का समय आते ही माइक्रोग्रीन्स की असली खूबी सामने आती है। आमतौर पर 7 से 21 दिनों के भीतर, जब पौधों में पहली असली पत्तियां निकल आएं और लंबाई 2 से 3 इंच हो जाए, तब कटाई कर लेनी चाहिए। कैंची या तेज चाकू से पौधों को मिट्टी की सतह के ठीक ऊपर से काटें। ताजी कटी माइक्रोग्रीन्स सलाद, सूप, सैंडविच और गार्निश के रूप में इस्तेमाल की जा सकती हैं।

कम जगह, कम समय और शानदार पोषण के कारण माइक्रोग्रीन्स न केवल सेहत के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि आय का अच्छा जरिया भी बन सकती हैं। यही वजह है कि आज माइक्रोग्रीन्स को भविष्य की खेती और सुपरफूड दोनों माना जा रहा है।

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