स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कहा है कि केंद्रीय बजट 2026-27 भारत को इनोवेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह बजट वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत करने पर केंद्रित है।
एसबीआई की ‘यूनियन बजट 2026-27 एनालिसिस रिपोर्ट’ में सेट्टी ने कहा कि बजट में नीतिगत निरंतरता और कर व्यवस्था को लेकर स्पष्टता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बजट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों, पारंपरिक और उभरते क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
सेट्टी के अनुसार, यह बजट एक ओर अनुमानित है तो दूसरी ओर भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट का ढांचा पहले के वर्षों जैसा ही है, जिसमें रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों और उभरते सेक्टरों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर बजट का मजबूत आधार बना हुआ है और इसमें निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही बैंकिंग सेक्टर के लिए भी बजट में कई अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
एसबीआई चेयरमैन ने कहा कि बदलते समय के साथ बैंकिंग प्रणाली को आधुनिक बनाना और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि भारत की विकास यात्रा को निरंतर समर्थन मिल सके।
उन्होंने बताया कि बजट के भविष्य-उन्मुख हिस्सों में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) तथा क्रिटिकल मिनरल्स जैसे सनराइज सेक्टरों पर विशेष जोर दिया गया है।
सेट्टी ने कहा कि बजट की गणनाएं 10 प्रतिशत की नाममात्र जीडीपी वृद्धि के अनुमान पर आधारित हैं। इसके आधार पर वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
कृषि और ग्रामीण क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि बजट में उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे चंदन, काजू और मत्स्य पालन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा 500 जलाशयों के एकीकृत विकास और नारियल उत्पादन बढ़ाने की योजना का भी उल्लेख किया गया है।
बजट में कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसके लिए एग्री-स्टैक पोर्टलों को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव है।
सेवा क्षेत्र, विशेषकर पर्यटन, ऑरेंज इकॉनमी और शिक्षा पर भी बजट में ध्यान दिया गया है। ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ नामक एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए सिटी इकोनॉमिक रीजन तय करने और प्रत्येक रीजन को पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है।