उत्तर प्रदेश में नशीली कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। इस तस्करी सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल का भारतीय पासपोर्ट निरस्त कर दिया गया है। शुभम जायसवाल गिरफ्तारी से बचने के लिए भारत छोड़कर दुबई में रह रहा था। पासपोर्ट निरस्त होने के बाद अब दुबई में उसकी स्थिति अवैध मानी जाएगी। इससे उसके भारत प्रत्यर्पण या डिपोर्ट होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
पासपोर्ट निरस्त, दुबई को दी गई सूचना
सूत्रों के अनुसार, लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी होने के बाद केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से शुभम जायसवाल का पासपोर्ट निरस्त करने की सूचना दुबई प्रशासन को भेज दी गई है। पासपोर्ट निरस्त होते ही उस पर लगे सभी वैध वीजा, जैसे अमेरिका, ब्रिटेन या खाड़ी देशों के वीजा, तकनीकी रूप से अमान्य हो जाते हैं।
नियमों के अनुसार, यदि किसी भारतीय नागरिक का पासपोर्ट विदेश में रहते हुए रद्द कर दिया जाता है, तो वह उस देश में अवैध प्रवासी की श्रेणी में आ जाता है। ऐसी स्थिति में संबंधित देश उस व्यक्ति को भारत डिपोर्ट कर सकता है।
सूत्रों का कहना है कि अब शुभम जायसवाल केवल इमरजेंसी सर्टिफिकेट (ईसी) के माध्यम से ही भारत लौट सकता है। इस बीच, एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियां लगातार उसके ठिकाने और गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
कोडीन कफ सिरप तस्करी का मामला
यह मामला उत्तर प्रदेश में नशीली कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री और तस्करी से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह सिंडिकेट उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था। कोडीन युक्त कफ सिरप को गैरकानूनी तरीके से एक राज्य से दूसरे राज्य में सप्लाई किया जा रहा था।
अब तक इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। हाल ही में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की कड़ियों का खुलासा हुआ है।
विकास सिंह नरवे की भूमिका
जांच एजेंसियों के अनुसार, विकास सिंह नरवे इस तस्करी सिंडिकेट की एक अहम कड़ी था। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई नए तथ्यों के सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) दोनों ही विकास सिंह को कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि विकास सिंह ने ही शुभम जायसवाल को बड़े तस्करों अमित सिंह उर्फ अमित टाटा और एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह से मिलवाया था। इसके बाद इस अवैध कारोबार का दायरा तेजी से बढ़ा। विकास सिंह का काम इन लोगों के बीच मध्यस्थ के रूप में संपर्क बनाए रखना था।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस के मुताबिक, विकास सिंह नरवे का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी। सर्विलांस और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि विकास सिंह इस पूरे नेटवर्क का रणनीतिकार था और तस्करी के संचालन में उसकी भूमिका अहम रही है।
जांच एसआईटी को सौंपी गई
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच अब विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंपी गई है। एसआईटी सिंडिकेट के वित्तीय लेनदेन, अंतरराज्यीय नेटवर्क और विदेश से जुड़े कनेक्शनों की भी जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, शुभम जायसवाल के पासपोर्ट निरस्तीकरण को जांच में एक अहम कदम माना जा रहा है।