विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू की गई नई इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर देशभर में चल रहे विरोध और कानूनी चुनौती के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 29 जनवरी को इन नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि विस्तृत सुनवाई और समीक्षा पूरी होने तक वर्ष 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
UGC की नई इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया है। यह पीठ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की थी। अदालत ने कहा कि नियमों की संवैधानिक वैधता और सामाजिक प्रभावों की गहन जांच आवश्यक है।
UGC मुख्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रदर्शन:
नई इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर इस सप्ताह UGC मुख्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन हुए। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने UGC कार्यालय के बाहर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।
UGC विरोध समूह के चार सदस्यों ने कार्यालय में प्रवेश कर एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नियमों की परिभाषा, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को शामिल किए जाने और झूठी शिकायतों पर दंड के प्रावधान न होने को लेकर आपत्ति जताई गई। प्रतिनिधिमंडल ने UGC के अध्यक्ष विनीत जोशी से मुलाकात कर संशोधन की मांग रखी।
बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित आर्ट्स फैकल्टी के पास करीब 50 छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने नियमों को अस्पष्ट और विभाजनकारी बताते हुए इन्हें पूरी तरह वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने डीयू प्रॉक्टर कार्यालय को ज्ञापन सौंपा। एक पीएचडी शोधार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल तक बढ़ाया जा सकता है।
केंद्र सरकार का पक्ष:
मंगलवार को केंद्र सरकार ने नई इक्विटी रेगुलेशंस का बचाव किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य सभी छात्रों के लिए सुरक्षित और समान वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के तहत किसी भी छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा और दुरुपयोग की आशंकाएं निराधार हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और आदेश:
गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने UGC की इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर अस्थायी रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि जब तक मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक 2012 के नियम लागू रहेंगे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनीत जिंदल ने मृत्तुंजय तिवारी, राहुल देवन और अन्य की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नए नियम संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
केंद्र सरकार और UGC की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल उठाया कि क्या ये नियम समाज को आगे ले जाने के बजाय पीछे की ओर ले जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को एकता का प्रतीक होना चाहिए, न कि विभाजन का।
न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि रैगिंग जैसे मुद्दों को बिना पहचान आधारित विभाजन के नियंत्रित किया जाता है, ऐसे में नए ढांचे की आवश्यकता पर सवाल उठता है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि नियमों की अस्पष्ट भाषा का दुरुपयोग व्यक्तिगत द्वेष के लिए हो सकता है।
CJI सूर्य कांत ने सुझाव दिया कि सामाजिक मूल्यों और मुद्दों को ध्यान में रखते हुए प्रतिष्ठित विधिवेत्ताओं की एक समिति द्वारा इन नियमों की समीक्षा की जानी चाहिए।
नियमों की पृष्ठभूमि:
UGC ने 13 जनवरी 2026 को नई इक्विटी रेगुलेशंस लागू की थीं, जो वर्ष 2012 के नियमों का स्थान लेती हैं। ये नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद तैयार किए गए थे, जिनमें जातिगत भेदभाव के आरोप सामने आए थे। UGC के अनुसार, ऐसे मामलों में वृद्धि के मद्देनज़र सख्त नियमों की आवश्यकता महसूस की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 के लिए निर्धारित की है। तब तक UGC को नए नियमों को लागू करने से रोक दिया गया है।