सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी TikTok ने अमेरिका में अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। शुक्रवार को TikTok ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि उसने अपने अमेरिकी परिचालन के लिए एक नई बहुमत अमेरिकी-स्वामित्व वाली संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) संरचना को अंतिम रूप दे दिया है। यह फैसला चीन से जुड़े स्वामित्व को लेकर वर्षों से चल रहे राजनीतिक और नियामक विवाद को समाप्त करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
नई कंपनी का नाम TikTok USDS Joint Venture LLC रखा गया है, जो अमेरिका में TikTok के 20 करोड़ से अधिक यूज़र्स और लगभग 75 लाख व्यवसायों को सेवाएं देगी। इस नई व्यवस्था के तहत TikTok का अमेरिकी संचालन अब सीधे अमेरिकी निवेशकों और कंपनियों के नियंत्रण में होगा, जबकि इसकी चीनी मूल कंपनी ByteDance की भूमिका सीमित कर दी गई है।
अमेरिका को मिली निर्णायक हिस्सेदारी, ByteDance पीछे हटी
इस समझौते के तहत अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के पास संयुक्त रूप से 80.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। वहीं TikTok की चीनी पेरेंट कंपनी ByteDance को केवल 19.9 प्रतिशत हिस्सेदारी पर सीमित कर दिया गया है। यह बदलाव अमेरिकी सरकार की उस लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर TikTok को चीनी प्रभाव से मुक्त करने की बात कही जाती रही है।
नए जॉइंट वेंचर में प्रमुख निवेशकों में अमेरिकी टेक कंपनी Oracle, निजी इक्विटी फर्म Silver Lake और अबू धाबी स्थित निवेश समूह MGX शामिल हैं। इन तीनों के पास संयुक्त उद्यम में 15-15 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा Dell Family Office, Alpha Wave Partners, Revolution और NJJ Capital जैसी कंपनियां भी हिस्सेदार बनी हैं।
डेटा सुरक्षा और एल्गोरिदम पर सख्त निगरानी
TikTok ने स्पष्ट किया है कि नया जॉइंट वेंचर डेटा सुरक्षा, साइबरसुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर बेहद कड़े मानकों के तहत काम करेगा। अमेरिकी यूज़र्स का डेटा अमेरिका में ही स्टोर और प्रोसेस किया जाएगा और इस पर अमेरिकी कानूनों के तहत निगरानी होगी।
कंपनी के अनुसार, ऐप के सिफारिशी एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और तकनीकी ढांचे पर भी विशेष सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे ताकि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप की आशंका न रहे। यही वह मुद्दा था, जिसे लेकर अमेरिकी सरकार और सांसद लगातार चिंता जताते रहे हैं।
2020 से चला आ रहा था राजनीतिक दबाव
TikTok को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए ऐप को अमेरिका में प्रतिबंधित करने की कोशिश की थी। उस समय ट्रंप प्रशासन का आरोप था कि TikTok अमेरिकी नागरिकों का डेटा चीनी सरकार के साथ साझा कर सकता है।
बाद में कानूनी अड़चनों और प्रशासनिक बदलावों के चलते TikTok पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लग पाया, लेकिन कंपनी पर स्वामित्व बदलने और अमेरिकी नियंत्रण स्वीकार करने का दबाव लगातार बना रहा।
ट्रंप ने लिया समझौते का श्रेय
इस नए समझौते के सामने आते ही डोनाल्ड ट्रंप ने इसका खुलकर स्वागत किया और इसका श्रेय खुद को दिया। ट्रंप ने कहा कि उनकी सख्त नीति और दबाव की वजह से ही TikTok को यह बदलाव करना पड़ा।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा,
“TikTok को बचाने में मदद करके मुझे बहुत खुशी हुई है। अब इसका स्वामित्व महान अमेरिकी देशभक्तों और निवेशकों के एक समूह के पास होगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा और प्रभावशाली समूह है, और TikTok एक महत्वपूर्ण अमेरिकी आवाज बनेगा।”
शी जिनपिंग को भी कहा धन्यवाद
ट्रंप ने अपने बयान में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने इस समझौते को मंजूरी देने में सहयोग किया।
ट्रंप के अनुसार,
“मैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने हमारे साथ काम किया और अंततः इस समझौते को मंजूरी दी।”
यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि TikTok सौदे को लेकर अमेरिका और चीन के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत भी हुई।
TikTok के लिए क्यों अहम है यह समझौता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता TikTok के लिए अमेरिका जैसे बड़े बाजार में बने रहने की कीमत है। अमेरिका TikTok का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बाजार है, जहां करोड़ों यूज़र्स और लाखों कंटेंट क्रिएटर्स इस प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं।
यदि TikTok इस समझौते पर सहमत नहीं होता, तो उसे अमेरिका में प्रतिबंध या गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता था, जिससे कंपनी के वैश्विक कारोबार पर भारी असर पड़ता।
क्या यह ‘बिक्री’ है या रणनीतिक समझौता?
राजनीतिक हलकों में इस कदम को लेकर बहस जारी है। कुछ लोग इसे ट्रंप के दबाव में TikTok की “बिक्री” बता रहे हैं, जबकि कंपनी इसे एक रणनीतिक पुनर्गठन कह रही है।
हालांकि, वास्तविकता यह है कि ByteDance की निर्णायक भूमिका अब समाप्त हो चुकी है और TikTok का अमेरिकी संचालन प्रभावी रूप से अमेरिकी नियंत्रण में चला गया है।
इस नए ढांचे के लागू होने के बाद TikTok को उम्मीद है कि अमेरिका में उस पर मंडरा रहा प्रतिबंध का खतरा टल जाएगा। साथ ही, कंपनी अमेरिकी नियामकों और सरकार के साथ अधिक स्थिर और भरोसेमंद संबंध बना सकेगी।
विश्लेषकों का कहना है कि यह सौदा भविष्य में अन्य चीनी टेक कंपनियों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जो अमेरिकी बाजार में काम करना चाहती हैं।