मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत भले ही मजबूती के साथ हुई हो, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। दिन के ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली और चुनिंदा दिग्गज शेयरों में बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स फिसल गए। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का उत्साह दिखा, लेकिन जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, बाजार पर दबाव बढ़ता चला गया।
बीएसई सेंसेक्स ने कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की और शुरुआती घंटों में 379.86 अंकों की तेजी के साथ 84,258.03 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। हालांकि, ऊपरी स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिसके चलते सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 550 अंक टूट गया। बाद में यह 198.79 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,679.38 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।
इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी शुरुआती बढ़त को कायम नहीं रख सका। निफ्टी ने दिन में 25,899.80 का उच्च स्तर छुआ, लेकिन बाद में फिसलकर 25,750 के अहम स्तर से नीचे आ गया। आखिरी उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 29.85 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,760.40 पर ट्रेड कर रहा था।
गौरतलब है कि सोमवार को बाजार में राहत भरी तेजी देखने को मिली थी। लगातार पांच कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 0.4 प्रतिशत चढ़कर बंद हुए थे। इस गिरावट के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में कुल मिलाकर लगभग 2.5 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। सोमवार की तेजी को भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में दोबारा गति आने की उम्मीद से समर्थन मिला था। अमेरिकी दूत के एक बयान से संकेत मिला था कि दोनों देश व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे, जिससे निवेशकों की धारणा मजबूत हुई थी।
हालांकि, मंगलवार को यह सकारात्मकता ज्यादा देर तक बरकरार नहीं रह सकी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से लगातार पूंजी निकासी भी बाजार की धारणा पर भारी पड़ी।
सेक्टोरल स्तर पर बात करें तो ऑटो, आईटी और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। इन सेक्टरों में बिकवाली के चलते बाजार की कुल चाल पर नकारात्मक असर पड़ा। कई प्रमुख ब्लू-चिप शेयरों में भी मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे सूचकांकों पर और दबाव बढ़ गया।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। इसके साथ ही, अमेरिका और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता का माहौल भी उभरते बाजारों, जिनमें भारत शामिल है, पर असर डाल रहा है।
बाजार जानकारों के मुताबिक, हाल के दिनों में आई गिरावट के बाद तकनीकी तौर पर कुछ रिकवरी स्वाभाविक थी, लेकिन मजबूत ट्रिगर्स के अभाव में यह तेजी सीमित रह सकती है। निवेशक फिलहाल तिमाही नतीजों, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
मंगलवार का सत्र यह दर्शाता है कि बाजार अभी भी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में दबाव के कारण सूचकांक अपनी शुरुआती बढ़त गंवा बैठे। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या घरेलू बाजार मजबूत बुनियादी कारकों के दम पर स्थिरता हासिल कर पाता है या फिर उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला जारी रहता है।