अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में मंगलवार (स्थानीय समय) को आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स पर एक अहम मंत्रीस्तरीय बैठक में भारत के केंद्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भाग लिया। इस उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स, विशेष रूप से रेयर अर्थ एलिमेंट्स, की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित, मजबूत और विविध बनाना था।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनियाभर में रणनीतिक खनिजों की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और अत्याधुनिक तकनीक से जुड़े उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। ऐसे में इन खनिजों की आपूर्ति कुछ गिने-चुने देशों तक सीमित होना, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के ट्रेजरी विभाग में विभिन्न देशों के वित्त मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की इस बैठक को बुलाया। बैठक में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को कैसे सुरक्षित किया जाए, कैसे उसे अधिक लचीला और भरोसेमंद बनाया जाए, और कैसे एक-दूसरे पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जाए।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत जैसे तेजी से बढ़ते विनिर्माण वाले देश के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तेजी से आगे बढ़ रही है और ऐसे में रेयर अर्थ मिनरल्स और अन्य अहम खनिजों की निर्बाध उपलब्धता देश की औद्योगिक प्रगति के लिए अनिवार्य है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस मंत्रीस्तरीय बैठक में विभिन्न देशों ने अपने अनुभव साझा किए और यह बताया कि वे अपनी-अपनी आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से खनिज अयस्कों के शोधन (रिफाइनिंग) और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर चर्चा का उल्लेख किया। उनका कहना था कि उच्च गुणवत्ता वाले क्रिटिकल मिनरल्स, खासकर रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स, को लंबे समय तक टिकाऊ और स्थिर तरीके से सुरक्षित करना सभी देशों की साझा जरूरत है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि बैठक में नए प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग, निवेश के अवसरों और विभिन्न देशों के बीच तकनीक साझा करने जैसे अहम विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है।
बैठक के बाद अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका के ट्रेजरी विभाग द्वारा आयोजित इस वित्त मंत्रीस्तरीय बैठक में उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि सभी देशों में क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन से जुड़ी कमजोरियों को जल्द दूर करने की साझा इच्छा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस बात को लेकर आशावादी हैं कि देश ‘डिकपलिंग’ के बजाय ‘प्रूडेंट डि-रिस्किंग’ यानी समझदारी भरे जोखिम प्रबंधन का रास्ता अपनाएंगे।
स्कॉट बेसेंट ने यह स्पष्ट किया कि पूरी तरह अलग-थलग पड़ने के बजाय देशों को मिलकर आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना चाहिए, ताकि किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके। उन्होंने मौजूदा कमजोरियों को दूर करने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।
इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे प्रमुख देशों के वित्त मंत्री और प्रतिनिधि शामिल हुए। इन देशों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति शृंखला को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहमति बन रही है।
अमेरिका ने बैठक के दौरान उन कदमों और निवेशों की जानकारी भी दी, जो उसने पहले ही उठाए हैं और जो भविष्य में उठाने की योजना है। अमेरिकी पक्ष ने बताया कि उसका लक्ष्य एक ऐसी आपूर्ति शृंखला बनाना है जो सुरक्षित, विविध और किसी भी तरह के व्यवधान से निपटने में सक्षम हो।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में यह भी माना गया कि वर्तमान में क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन अत्यधिक केंद्रीकृत हो गई है और किसी भी तरह के भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक प्रतिबंध या तकनीकी अड़चन के कारण इसमें भारी व्यवधान आ सकता है। यही कारण है कि इन शृंखलाओं को अधिक लचीला और पारदर्शी बनाना समय की मांग है।
स्कॉट बेसेंट ने बैठक में शामिल देशों से अपील की कि वे आपसी सहयोग बढ़ाएं, एक-दूसरे के अनुभवों से सीखें और तेजी से मिलकर ठोस समाधान की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि केवल दीर्घकालिक और टिकाऊ रणनीतियों के जरिए ही क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति को सुरक्षित किया जा सकता है।
यह मंत्रीस्तरीय बैठक क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने वाली साबित हुई। भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि देश न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को लेकर सजग है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आने वाले समय में इस तरह की साझेदारियां वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी विकास की रीढ़ बन सकती हैं।