1.4 बिलियन लोगों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत किसी दबाव में नहीं आएगा, अमेरिका की 500% टैरिफ धमकी पर MEA का दोटूक जवाब

Vin News Network
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भारत ने अमेरिका की टैरिफ धमकी पर कहा, 140 करोड़ जनता की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि।

भारत ने रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की ओर से हाल ही में पेश किए गए 500% तक के टैरिफ प्रस्ताव पर स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि देश की ऊर्जा नीति किसी भी बाहरी दबाव के अधीन नहीं होगी। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत लगातार वैश्विक ऊर्जा बाजार का विश्लेषण कर रहा है और 140 करोड़ जनता की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे किफायती विकल्प अपनाएगा।

उन्होंने कहा, “हम किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। हमारी प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा और सस्ते ईंधन के जरिये आम जनता के हितों की रक्षा करना है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दुनिया के हर बाजार को टटोल रहा है और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकता।”

MEA ने अमेरिका के दावों को बताया गलत

विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों द्वारा पेश किए गए तथ्यों को पूरी तरह गलत बताया। अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी ने भारत को रूस से तेल खरीद में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया था। MEA ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत 13 फरवरी 2025 से गंभीर रूप से चल रही है और कई बार डील के बेहद करीब पहुंचा गया।

रणधीर जायसवाल ने कहा, “बातचीत का जिस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, वह सही नहीं है। भारत और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। हम एक संतुलित और दोनों पक्षों के हित में समझौते के लिए लगातार काम कर रहे हैं। हमारी प्राथमिकता एक ऐसी डील को अंतिम रूप देना है जो दोनों देशों के लिए लाभकारी हो।”

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच 8 बार हुई फोन पर चर्चा

विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि साल 2025 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 बार फोन पर बातचीत की। इन चर्चाओं में द्विपक्षीय साझेदारी, व्यापारिक समझौते और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ। यह सीधे संवाद दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को दर्शाता है, खासकर व्यापारिक खींचतान के समय में।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों पर भारत की चिंता

भारत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों और उनके घरों तथा व्यवसायों पर लगातार बढ़ रहे हमलों पर गंभीर चिंता जताई है। MEA ने इसे “खतरनाक पैटर्न” करार दिया और कहा कि दोषियों को बचाना, उन्हें दंडित न करने के बराबर है। मंत्रालय ने बांग्लादेश सरकार से तत्काल और कड़ी कार्रवाई करने की अपील की।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “अल्पसंख्यकों में भय और असुरक्षा की भावना गहरी हो रही है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसे सांप्रदायिक अपराधों को रोकने और दोषियों को दंडित करने में कोई ढिलाई न बरते।”

POK के शक्सगाम घाटी में चीन और पाकिस्तान को चेतावनी

भारत ने पाकिस्तान-चीन के बीच 1963 में हुए तथाकथित सीमा समझौते को पूरी तरह अवैध और अमान्य करार दिया। MEA ने स्पष्ट किया कि शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है और किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “चीनी निर्माण कार्य और घुसपैठ भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। भारत अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। जमीन पर यथास्थिति बदलने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी मान्यता देने से साफ इनकार किया। MEA ने कहा कि यह परियोजना भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करती है।

अमेरिका के बहुपक्षवाद से हटने पर भारत का रुख

MEA ने अमेरिका के कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं से हटने की घोषणा पर संतुलित, लेकिन स्पष्ट रुख अपनाया। मंत्रालय ने कहा कि भारत बहुपक्षवाद का दृढ़ समर्थक है और वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

विदेश मंत्रालय ने International Solar Alliance (ISA) का हवाला देते हुए कहा कि इस संगठन ने सौर ऊर्जा के विस्तार और 125 सदस्य देशों के बीच सहयोग मजबूत करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। MEA ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा के लिए संवाद और सहयोग अनिवार्य हैं।

भारत ने अमेरिका की 500% टैरिफ धमकी, रूस से तेल खरीद और बांग्लादेश तथा POK में चल रही घटनाओं पर स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत अपनी 140 करोड़ जनता की ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय संप्रभुता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी दबाव में नहीं आएगा। भारत का संदेश स्पष्ट है: अपनी नीतियों और हितों के लिए कोई समझौता नहीं।

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