भारतीय शेयर बाजार में आज गुरुवार को चौथे दिन लगातार गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने भारी बिकवाली के दबाव में लाल निशान दर्ज किया। निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी (FII outflows), अमेरिका के व्यापार और टैरिफ संकेतों, और वैश्विक आर्थिक माहौल के कारण बढ़ गई।
सुबह 12:10 बजे सेंसेक्स 713.82 अंक यानी 0.84 प्रतिशत गिरकर 84,247.32 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 में 251.10 अंक यानी 0.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 25,889.65 पर बंद हुआ। सेक्टोरल इंडेक्सों में सभी क्षेत्रों के शेयर लाल निशान में थे, जिनमें मेटल्स और ऑयल एवं गैस कंपनियों के शेयर प्रमुख रूप से कमजोर दिखे।
निफ्टी 50 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, हिंदालको इंडस्ट्रीज और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियों के शेयर 2 प्रतिशत तक गिर गए। इसके विपरीत ईटर्नल और अदानी पोर्ट्स एवं स्पेशल इकोनॉमिक जोन के शेयर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर हरे निशान में रहे। बाजार में कुल मिलाकर बिकवाली का दबाव अधिक था, जिसमें 1,767 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, 1,479 बढ़त में और 171 शेयर स्थिर रहे।
चार दिन में सेंसेक्स में 1,500 अंक की गिरावट, 7 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैपिटी घटा
पिछले चार सत्रों में भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव रहा। बीएसई सेंसेक्स ने चार दिन में कुल 1,465 अंक खो दिए, जबकि निफ्टी 50 में इस अवधि में 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन चार दिनों में बीएसई की सभी सूचीबद्ध कंपनियों की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 7.19 लाख करोड़ रुपये घटकर 474 लाख करोड़ रुपये पर आ गई।
शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Selling)
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी में अब तक FIIs ने लगभग 5,760 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले हैं। यह बिकवाली जनवरी की शुरुआत से ही लगातार जारी है और 2025 में रिकॉर्ड निकासी के बाद निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा रही है।
साप्ताहिक वायदा समाप्ति (Weekly Expiry)
गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव्स का साप्ताहिक एक्सपायरी दिन था। एक्सपायरी सत्रों में अक्सर निवेशक अपने पोजिशन को समेटते या रोलओवर करते हैं, जिससे बाजार में वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
वैश्विक संकेत कमजोर (Weak Global Cues)
एशियाई शेयर बाजारों में गुरुवार को कमजोरी देखी गई। MSCI एशिया-प्रशांत इंडेक्स (जापान को छोड़कर) 0.6 प्रतिशत गिरा। जापान का निक्की 1.2 प्रतिशत और चीन का CSI300 0.8 प्रतिशत टूट गया। अमेरिका और यूरोप के फ्यूचर्स में भी मंदी का रुझान रहा। नास्डैक फ्यूचर्स 0.35 प्रतिशत नीचे, S&P 500 फ्यूचर्स 0.22 प्रतिशत ऊपर, EUROSTOXX 50 फ्यूचर्स 0.12 प्रतिशत गिरा और FTSE फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत नीचे रहे।
वैश्विक निवेशक चीन और जापान के बीच व्यापार विवाद, वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता और अमेरिका के आगामी रोजगार रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों का अनुमान है कि दिसंबर में अमेरिकी नॉन-फार्म पे-रोल में 70,000 नौकरियों की वृद्धि होगी, जबकि बेरोजगारी दर 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Crude Oil Prices)
ब्रेंट क्रूड का भाव 0.4 प्रतिशत बढ़कर 60.20 डॉलर प्रति बैरल हो गया। भारत तेल का अधिकतर आयात करता है, इसलिए बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें भारतीय कंपनियों और अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक हैं।
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार तनाव (Trade Deal Concerns)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वह रूस पर नए द्विपक्षीय प्रतिबंध विधेयक का समर्थन कर सकते हैं, जिसमें रूस से आयात पर कम से कम 500 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है। इस प्रस्ताव का असर भारत, चीन और ब्राजील पर भी पड़ सकता है, जो रूस से डिस्काउंटेड तेल खरीदते हैं।
ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि भारत अमेरिकी चिंताओं को रूस से तेल की खरीद के संबंध में संबोधित नहीं करता है, तो भारतीय सामानों पर अधिक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिका पहले ही कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगा चुका है।
इसके अलावा ट्रंप ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर की शीघ्र डिलीवरी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि भारत ने 68 अपाचे हेलीकॉप्टर ऑर्डर किए हैं और यह मुद्दा अभी तक लंबित है। इस तरह के व्यापार और टैरिफ तनाव निवेशकों में अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं और बाजार की भावनाओं पर दबाव डाल रहे हैं।
विश्लेषकों की राय
जीओजिट इन्वेस्टमेंट्स के प्रमुख निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, “अमेरिका-भारत व्यापार सौदा, जो भारत की सतत वृद्धि और मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, अभी तक नहीं हो रहा है। इसके साथ-साथ लगातार FII बिकवाली का दबाव बाजार पर बढ़ रहा है।”
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रमुख शोधक देवरश वकील का कहना है कि “संक्षिप्त अवधि में कमजोरी के बावजूद दीर्घकालिक प्रवृत्ति अभी भी सकारात्मक बनी हुई है। दैनिक चार्ट में उच्चतम और निम्नतम स्तरों का पैटर्न बाजार की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा कि 26,373 का हाल का स्विंग हाई प्रतिरोध स्तर के रूप में कार्य करेगा, जबकि 26,000 नज़दीकी समर्थन स्तर प्रदान कर सकता है।
आज की गिरावट का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिका-भारत व्यापार तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, तेल की बढ़ती कीमतें और साप्ताहिक डेरिवेटिव एक्सपायरी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी दृष्टि से बाजार ने इस कमजोरी को पहले ही अवशोषित किया है और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से बाजार सकारात्मक रुझान बनाए रखने में सक्षम है।
निवेशक इन दिनों वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी व्यापार नीतियों और एफआईआई निवेश प्रवाह पर ध्यान रख रहे हैं, जो भारतीय शेयर बाजार की दिशा निर्धारित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।