केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में उभर रही “व्हाइट-कॉलर आतंकवाद” की प्रवृत्ति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यह एक चिंताजनक और खतरनाक रुझान है, जिसमें उच्च शिक्षित और पेशेवर लोग राष्ट्रविरोधी व असामाजिक गतिविधियों में शामिल पाए जा रहे हैं। शुक्रवार को उदयपुर स्थित भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के 104वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने शिक्षा और नैतिक मूल्यों के बीच बढ़ती दूरी पर गहरी चिंता जताई।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का दौर यह दिखा रहा है कि डिग्रियां तो मिल रही हैं, लेकिन ‘धर्म’ यानी नैतिक जिम्मेदारी कमजोर होती जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी या आर्थिक सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें चरित्र निर्माण, कर्तव्यबोध, विनम्रता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी शामिल होना चाहिए। मंत्री के अनुसार, ज्ञान यदि नैतिकता और विवेक से जुड़ा न हो, तो वही ज्ञान समाज के लिए विनाशकारी बन सकता है।
अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने 10 नवंबर को दिल्ली के रेड फोर्ट के पास हुए कार बम धमाके का उल्लेख करते हुए इस खतरे की गंभीरता को रेखांकित किया। इस आतंकी हमले में 15 लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने बताया कि इस हमले के आरोपी कोई अशिक्षित या गुमराह युवक नहीं थे, बल्कि उच्च शिक्षित डॉक्टर थे। उन्होंने इसे बेहद विडंबनापूर्ण बताते हुए कहा कि जो लोग जीवन बचाने के लिए दवाइयों के पर्चे लिखने की ट्रेनिंग लेते हैं, वही लोग आरडीएक्स जैसे विस्फोटकों के साथ पकड़े गए।
जांच में सामने आया कि यह हमला एक संगठित और तकनीकी रूप से मजबूत व्हाइट-कॉलर आतंकी नेटवर्क द्वारा अंजाम दिया गया था। इस मामले में डॉ. उमर-उन-नबी, जिन पर विस्फोटकों से भरी गाड़ी चलाने का आरोप है, सहित डॉ. मुज़म्मिल गनई, डॉ. आदिल रदर और डॉ. शाहीना सईद को गिरफ्तार किया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है, जहां नैतिक शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।
राजनाथ सिंह ने “धर्म” शब्द की व्याख्या करते हुए साफ किया कि उनका आशय किसी विशेष धर्म, पूजा-पाठ या धार्मिक स्थल से नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां धर्म का मतलब है नागरिक कर्तव्य, नैतिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति निष्ठा। उनके अनुसार, यदि शिक्षा केवल डिग्री और स्किल तक सीमित रह जाए और उसमें समाज व देश के प्रति जवाबदेही न हो, तो वह शिक्षा अधूरी है।
आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के अलावा रक्षा मंत्री ने भारत की सैन्य और आर्थिक प्रगति को लेकर आशावादी तस्वीर भी पेश की। उन्होंने कहा कि देश में डिफेंस स्टार्टअप्स उल्लेखनीय काम कर रहे हैं, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सिंह ने विश्वास जताया कि अगले 15 से 20 वर्षों में भारत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा।
उन्होंने इस प्रगति को भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2030 तक तीसरे स्थान पर पहुंचने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री के अनुसार, आर्थिक मजबूती और सैन्य आत्मनिर्भरता, दोनों ही भारत की वैश्विक भूमिका को और सशक्त बनाएंगे।
अपने भाषण के अंत में राजनाथ सिंह ने शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षकों से विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल शोध पत्र प्रकाशित करने या रैंकिंग सुधारने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें बहुविषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) शोध को बढ़ावा देना चाहिए, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान निकाल सके। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा का अंतिम लक्ष्य एक जिम्मेदार, संवेदनशील और राष्ट्रहित में सोचने वाला नागरिक तैयार करना होना चाहिए।
रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश आंतरिक सुरक्षा, कट्टरपंथ और तकनीकी रूप से सक्षम आतंकी नेटवर्क जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनके शब्दों में, डिग्री के साथ धर्म और ज्ञान के साथ विवेक ही वह रास्ता है, जो भारत को सुरक्षित, सशक्त और नैतिक रूप से मजबूत बना सकता है।