भारत में माल और सेवा कर (GST) संग्रह दिसंबर 2025 में 6.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 1,74,550 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो दिसंबर 2024 में 1,64,556 करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा वित्त मंत्रालय द्वारा 1 जनवरी 2026 को जारी किया गया।
साथ ही, GST रिफंड में भी तेजी देखी गई और यह वर्ष-दर-वर्ष 30.9 प्रतिशत बढ़कर 28,980 करोड़ रुपये हो गया। दिसंबर 2025 में सकल GST राजस्व 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि आयात पर लगाया गया कर 19.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 51,977 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
नेट GST राजस्व दिसंबर 2025 में 1.45 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 2.2 प्रतिशत अधिक है।
वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में सकल GST संग्रह 16.50 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 15.19 लाख करोड़ रुपये के संग्रह की तुलना में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर MS मणि ने कहा, “FY26 के पहले छह महीनों में मजबूत वृद्धि देखने को मिली, लेकिन 22 सितंबर से GST दरों में हुई कटौती के कारण वृद्धि की गति थोड़ी धीमी पड़ गई। फिर भी, मासिक आधार पर 6.1 प्रतिशत और समग्र आधार पर 8.6 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि उपभोक्ता खर्च में वृद्धि जारी है और कई व्यवसायों में वॉल्यूम ग्रोथ ने कम दरों के असर को संतुलित किया है।”
उन्होंने आगे कहा कि सकल GST संग्रह, नेट संग्रह की तुलना में अधिक भरोसेमंद संकेतक हैं, क्योंकि महीने में किए गए रिफंड पिछली माह की आर्थिक गतिविधियों से सीधे जुड़े नहीं होते। इसके अलावा, सकारात्मक GDP वृद्धि यह संकेत देती है कि आर्थिक विकास मजबूत है और कम दरें कई क्षेत्रों में खपत बढ़ाने में मदद कर रही हैं।
राज्यों के प्रदर्शन में अंतर
हालांकि, कुछ राज्यों में GST संग्रह में गिरावट देखी गई। मणि ने बताया कि 17 राज्यों में GST संग्रह नकारात्मक रहा। इनमें दिल्ली (-4%), बिहार (-7%), मध्य प्रदेश (-1%), तेलंगाना (-3%) और तमिलनाडु (-3%) शामिल हैं।
कई बड़े राज्यों जैसे महाराष्ट्र (4%), कर्नाटक (5%), आंध्र प्रदेश (2%) और हरियाणा (1%) में भी विकास केवल एकल अंक तक सीमित रहा। इसके विपरीत, वित्त वर्ष के शुरुआती हिस्से में कुछ राज्यों ने मजबूत सकारात्मक वृद्धि दर्ज की थी।
वाणिज्य और उपभोक्ता खर्च पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि GST दरों में कमी के बावजूद खपत में वृद्धि से संग्रह मजबूत बना हुआ है। यह संकेत देता है कि उपभोक्ता बाजार में सक्रिय हैं और व्यवसायों की बिक्री वॉल्यूम ने कम दर के प्रभाव को संतुलित किया है।
सकल GST संग्रह की यह वृद्धि संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी और वैश्विक मंदी के प्रभाव से उबर रही है और उत्पादन तथा उपभोग दोनों में स्थिर वृद्धि हो रही है।
इसके साथ ही, यह भी ध्यान देने योग्य है कि पिछली वित्तीय वर्ष की तुलना में GST दरें काफी अधिक थीं। इसलिए, दिसंबर 2025 के संग्रह में मामूली वृद्धि दर का मतलब यह नहीं कि अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है, बल्कि यह संकेत देता है कि दरों में कमी के बावजूद खपत स्थिर है।
दिसंबर 2025 का GST आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थिर वृद्धि जारी है। उपभोक्ता खर्च बढ़ा है और कई व्यवसायों में बिक्री वॉल्यूम में सुधार हुआ है। हालांकि, राज्यों के बीच संग्रह के आंकड़ों में असमानता और कुछ राज्यों में नकारात्मक वृद्धि चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में सरकार के नीति और दरों के संतुलन से संग्रह और अधिक स्थिर और संतुलित रह सकता है। यह आंकड़ा न केवल वित्तीय स्वास्थ्य का संकेत है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि उपभोक्ता और व्यावसायिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
दिसंबर 2025 में GST संग्रह ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिर वृद्धि और उपभोक्ता विश्वास को दर्शाया है, जबकि कुछ राज्यों में गिरावट सुधार की जरूरत को उजागर करती है।