राजस्थान के उदयपुर में एक निजी आईटी कंपनी की महिला मैनेजर ने अपनी संदर्भित *सहकर्मियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि एक बर्थडे पार्टी के बाद उसके साथ गैरकानूनी और आपराधिक कृत्य किए गए, जिसमें कंपनी के सीईओ भी शामिल थे। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करते हुए चार दिनों की पुलिस रिमांड मंजूर करवाई है।
पुलिस के अनुसार यह घटना पिछले शनिवार को हुई जब आरोपी आईटी कंपनी के सीईओ, जीतेश सिसोदिया ने अपना जन्मदिन मनाया। पार्टी में कंपनी की महिला मैनेजर भी आमंत्रित थीं। पार्टी संपन्न होने के बाद अन्य मेहमान क्रमशः चले गए और महिला मैनेजर अकेली रह गईं।
महिला के अकेले होने का फायदा उठाया गया:
पुलिस के बयान के अनुसार जैसे‑जैसे पार्टी के अन्य अतिथि लौटने लगे, महिला मैनेजर अकेली हो गईं। इसी के बाद पार्टी में मौजूद एक महिला कार्यकारी प्रमुख ने उसे घर छोड़ने का प्रस्ताव रखा और दोनों कार से वहाँ से रवाना हुए। कार में साथ में सीईओ जीतेश सिसोदिया और गौऱव सिरोही (मेरठ निवासी और महिला कार्यकारी प्रमुख के पति) भी सवार थे।
रास्ते में कुछ सूंघने को दिया गया:
महिला की शिकायत के अनुसार मार्ग में कार रुकवाई गई और तीनों आरोपियों ने बाजार से कुछ लिया, जिसे कुछ ऐसा बताया गया जो सिगरेट जैसा दिखता था। आरोप है कि उन्होंने महिला को यह पदार्थ दिया और उसे लेने के बाद महिला बेहोश हो गई। महिला का यह भी कहना है कि जब वह होश में आई तो अगले दिन सुबह खुद को गैरकानूनी यौन कृत्य का शिकार पाया, जोकि उसके अनुसार आपराधिक था।
पुलिस में गंभीर शिकायत दर्ज, मामला दर्ज:
महिला मैनेजर द्वारा शिकायत मिलने के बाद सुखेर पुलिस स्टेशन में प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। शिकायत के आधार पर ही पुलिस ने आरोपियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि महिला के बयान दर्ज कर मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है।
पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई:
उदयपुर के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) योगेश गोयल ने बताया कि मामले की त्वरित जांच की जा रही है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर गुरुवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें चार दिनों के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
उदयपुर पुलिस ने बताया कि इस मामले की जांच एडिशनल एसपी, मधुरी वर्मा के नेतृत्व में चल रही है। उन्होंने कहा कि सबूतों और शुरूआती जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
कंपनी में तनाव और विवाद:
घटना की गंभीरता को देखते हुए कंपनी में भी तनाव और विवाद की स्थिति बन गई है। एक महिला कर्मचारी के साथ कथित अपराध के आरोप ने कंपनी के भीतर और बाहर चिंता बढ़ा दी है। कंपनी के उच्च अधिकारियों ने कथित आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
कहीं‑कहीं से सवाल उठे:
ऐसे समय में जब काम के माहौल में सुरक्षा और सम्मान की उम्मीद की जाती है, यह मामला उन सिद्धांतों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार कार्यस्थल की सुरक्षा नीतियों, कंपनी‑स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों, और सुरक्षित परिवहन सुविधाओं पर गंभीर रूप से पुनर्विचार किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे आरोप दोबारा न उठें।
पुलिस की विस्तृत जांच:
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पार्टी के बाद महिला मैनेजर को अकेला छोड़ा गया था, किन परिस्थितियों में उसे कार में बैठने का आग्रह किया गया, और कथित तौर पर दिए गए पदार्थ की पहचान तथा उसका प्रभाव क्या रहा। इसके लिए पुलिस ने आसपास के दुकानों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं, ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
पीड़िता का दर्द और समाज की भूमिका:
पीड़िता की शिकायत और बयान से स्पष्ट है कि वह मानसिक और शारीरिक तौर पर काफी परेशान है। हादसे के बाद उसने हिम्मत दिखाई और पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराई, जिससे अन्य महिलाओं को भी न्याय दिलाने में मदद मिल सकती है। सामाजिक कार्यकर्ता भी इस घटना पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि ऐसा व्यवहार समाज में बर्दाश्त न किया जाए।
आगे की कानूनी प्रक्रिया:
अब पुलिस जांच के बाद यदि सबूत मजबूत पाए जाते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और अन्य संबंधित कानूनों के तहत आरोप तय किए जाएंगे। अदालत द्वारा बढ़ाई गई पुलिस रिमांड में पुलिस और सख्त पूछताछ करेगी और सभी पहलुओं को उजागर करने का प्रयास करेगी।
उदयपुर में जन्मदिन की पार्टी के बाद एक महिला मैनेजर के साथ कथित गैंगरेप का मामला सामने आया है। इसमें एक कंपनी का सीईओ, कंपनी की महिला कार्यकारी प्रमुख और उनके पति शामिल हैं। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है और चार दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। मामले की जांच जारी है और आरोप गंभीर हैं। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और बयानों की रिकॉर्डिंग भी हो चुकी है। यह मामला कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल के नैतिक मूल्यों, और कानून के पालन के महत्व पर गंभीर प्रश्न उठाता है।