चीन ने अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की एक हालिया रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए उस पर भारत के साथ संबंधों को लेकर “गलत नैरेटिव गढ़ने” और देशों के बीच फूट डालने का आरोप लगाया है। चीन ने स्पष्ट किया कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल “सामान्य और स्थिर” है तथा दोनों देशों के बीच संवाद के चैनल सक्रिय हैं। बीजिंग का कहना है कि अमेरिका इस तरह की रिपोर्टों के जरिए अपने सैन्य प्रभुत्व को बनाए रखने का बहाना तलाश रहा है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पेंटागन की रिपोर्ट चीन की रक्षा नीति को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है और अन्य देशों के साथ चीन के संबंधों में अविश्वास पैदा करने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट चीन की रक्षा नीति को विकृत करती है, देशों के बीच मतभेद उकसाती है और अमेरिका के सैन्य वर्चस्व को सही ठहराने का प्रयास है। चीन इसका दृढ़ता से विरोध करता है।”
अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन भारत के साथ सीमा पर तनाव में आई कमी का इस्तेमाल अमेरिका-भारत संबंधों को कमजोर करने के लिए कर रहा है, जबकि पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे को भी उसकी बढ़ती “कोर इंटरेस्ट्स” की सूची में शामिल बताया और इसकी तुलना ताइवान तथा समुद्री विवादों से की।
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2024 में भारत और चीन ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर शेष टकराव वाले इलाकों से पीछे हटने पर सहमति जताई थी। यह घोषणा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात से ठीक दो दिन पहले की गई थी। अमेरिकी आकलन में कहा गया कि चीन संभवतः एलएसी पर तनाव घटाकर द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करना चाहता है, ताकि अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की रफ्तार धीमी पड़े। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी जोड़ा कि भारत चीन की मंशाओं को लेकर सतर्क बना हुआ है और आपसी अविश्वास द्विपक्षीय रिश्तों की सीमाएं तय करता है।
इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए लिन जियान ने कहा कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को “रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण” से देखता है। उन्होंने जोर दिया कि बीजिंग संवाद बढ़ाने, आपसी विश्वास मजबूत करने, सहयोग को आगे बढ़ाने और मतभेदों को जिम्मेदारी से सुलझाने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि चीन-भारत के बीच एक स्थिर और संतुलित संबंध क्षेत्रीय शांति के लिए अहम है।
सीमा स्थिति पर बोलते हुए चीनी प्रवक्ता ने कहा कि सीमा विवाद दोनों देशों का द्विपक्षीय विषय है और मौजूदा हालात सामान्य हैं। उन्होंने कहा, “भारत-चीन सीमा पर स्थिति कुल मिलाकर स्थिर है और संवाद के माध्यम सुचारू हैं। चीन किसी तीसरे देश की आधारहीन और गैर-जिम्मेदार टिप्पणियों का विरोध करता है।” यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है जब अक्टूबर 2024 में कज़ान में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसके बाद एलएसी पर गतिरोध कम करने के लिए समझौते और नियमित उच्चस्तरीय संवाद की शुरुआत हुई।
अमेरिकी रिपोर्ट में चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग पर भी सवाल उठाए गए थे। इसमें यहां तक कहा गया कि चीन पाकिस्तान में सैन्य ठिकाना स्थापित करने पर विचार कर सकता है और दोनों देशों के बीच रक्षा व अंतरिक्ष सहयोग गहराता जा रहा है। इस पर चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और रिपोर्ट को चीन के आंतरिक मामलों में “घोर हस्तक्षेप” बताया।
झांग ने कहा कि अमेरिकी रिपोर्ट ने चीन की राष्ट्रीय रक्षा नीति को गलत तरीके से पेश किया है और उसके सैन्य विकास को लेकर निराधार अटकलें लगाई हैं। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट चीनी सेना की सामान्य गतिविधियों को बदनाम करने की कोशिश करती है और तथाकथित ‘चीन सैन्य खतरे’ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है।” हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग से जुड़े आरोपों पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया।
चीनी रक्षा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह झलकता है और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना है। उन्होंने अमेरिका से झूठे नैरेटिव गढ़ना बंद करने और टकराव को बढ़ावा न देने की अपील की।
बीजिंग ने अमेरिकी रिपोर्ट को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है और यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारत के साथ सीमा हालात नियंत्रण में हैं। चीन का कहना है कि वह नई दिल्ली के साथ स्थिर संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए संवाद और सहयोग के रास्ते पर कायम है, जबकि बाहरी हस्तक्षेप को अनावश्यक और नुकसानदेह मानता है।