डिजिटल जिहाद: मिडिल ईस्ट में खात्मे के बाद अब ‘ऑनलाइन’ और ‘लोन-वुल्फ’ हमलों से दुनिया को डरा रहा है आईएसआईएस

Vin News Network
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इस्लामिक स्टेट (ISIS) के स्वघोषित खिलाफत को ध्वस्त हुए छह साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इस संगठन की हिंसक विचारधारा का खतरा आज भी कम नहीं हुआ है। मध्य पूर्व (सीरिया और इराक) में अपनी क्षेत्रीय पकड़ खोने के बाद, यह समूह अब एक नए और अधिक खतरनाक स्वरूप में उभर रहा है। यह नया स्वरूप है—’डिजिटल कट्टरपंथ’ और ‘लोन-वुल्फ’ हमले, जिसका उदाहरण हाल ही में सिडनी के प्रसिद्ध बोंडी बीच पर हुए हिंसक हमले के रूप में देखने को मिला।

बदलती रणनीति: मैदान से इंटरनेट तक का सफर
एक समय था जब आईएसआईएस लेवेंट (सीरिया और इराक के हिस्से) के बड़े भूभाग पर अपना शासन चलाता था। तब यह समूह भौतिक रूप से लड़ाकों को प्रशिक्षित करता था और उन्हें युद्ध के मैदान में उतारता था। लेकिन आज, संगठन की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल चुकी है। अब यह संगठन भौतिक शिविरों के बजाय इंटरनेट का उपयोग कर रहा है। सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में बैठे युवाओं को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है।

यह ‘ऑनलाइन भर्ती’ मॉडल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि इसमें हमलावर का सीधे संगठन से कोई भौतिक संपर्क नहीं होता, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

गाजा संघर्ष का फायदा उठाता कट्टरपंथ
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में गाजा में चल रहे युद्ध ने इस आग में घी का काम किया है। कट्टरपंथी संगठन इस मानवीय संकट और युद्ध की तस्वीरों का इस्तेमाल युवाओं की भावनाओं को भड़काने के लिए कर रहे हैं। इस संघर्ष की आड़ में वे यहूदियों और पश्चिमी देशों के खिलाफ हिंसा को जायज ठहराते हैं। इंटरनेट पर मौजूद प्रोपेगेंडा के जरिए यह संदेश फैलाया जा रहा है कि इन हमलों के माध्यम से ही न्याय संभव है, जो सीधे तौर पर निर्दोष नागरिकों की जान लेने के लिए प्रेरित करता है।

ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर ‘नवीद’
सिडनी हमले की जांच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसियों की सतर्कता पर भी सवाल उठे हैं। खुफिया अधिकारियों ने 2019 में ही ‘नवीद’ (हमलावर का बेटा) की संदिग्ध गतिविधियों को भांप लिया था। उस समय नवीद पर एक कट्टरपंथी सेल से जुड़े होने का संदेह था, जो इसी चरमपंथी विचारधारा से प्रेरित था। हालांकि, उस वक्त की निगरानी के बावजूद इस तरह के ‘लोन-वुल्फ’ हमलों को पूरी तरह रोक पाना एक जटिल पहेली बना हुआ है।

लोन-वुल्फ हमले: सुरक्षा के लिए नई चुनौती
लोन-वुल्फ हमले वे होते हैं जहाँ एक व्यक्ति अकेले ही हमले की योजना बनाता है और उसे अंजाम देता है। चूंकि इसमें कोई बड़ा नेटवर्क या हथियारों की बड़ी खेप शामिल नहीं होती, इसलिए खुफिया एजेंसियां इसे ट्रैक करने में अक्सर पीछे रह जाती हैं। सिडनी का बोंडी बीच हमला इसी कड़वी सच्चाई का प्रमाण है कि भले ही आईएसआईएस का भौगोलिक साम्राज्य खत्म हो गया हो, लेकिन उसका ‘ब्रांड’ और हिंसा की प्रेरणा अभी भी जीवित है।

सतर्कता ही एकमात्र समाधान
आज दुनिया एक ऐसे दौर में है जहाँ युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर लड़ा जा रहा है। कट्टरपंथ का यह नया डिजिटल संस्करण किसी भी देश की शांति को भंग करने की क्षमता रखता है। सिडनी की घटना हमें याद दिलाती है कि अंतरराष्ट्रीय समुदायों और खुफिया एजेंसियों को केवल सीमा सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ) को रोकने के लिए एक ठोस वैश्विक रणनीति की आवश्यकता है।

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