संसद परिसर में बीते कुछ घंटों से एक नया विवाद सामने आया है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा के अंदर टीएमसी सांसद सौगत रॉय के ई-सिगरेट पीने का मुद्दा उठाने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें संसद परिसर के मकर गेट के पास ई-सिगरेट पीते देखा गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और गिरिराज सिंह ने उन्हें सीधे टोका।
सौगत रॉय का बचाव
टीएमसी सांसद ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए दिल्ली प्रदूषण का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण उन्होंने ई-सिगरेट का उपयोग किया, लेकिन केंद्रीय मंत्रियों ने इसे संसद परिसर में अनुचित बताया। उनका यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया और सोशल मीडिया पर भी विषय तेजी से वायरल हुआ।
बीजेपी सांसद ने उठाया मुद्दा
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने पहले ही लोकसभा में इस घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठाया था कि संसद परिसर में ई-सिगरेट का उपयोग क्यों किया जा रहा है और क्या यह नियमों के अनुसार उचित है। उनका कहना था कि संसद परिसर में किसी भी तरह के तम्बाकू या धूम्रपान उत्पाद का उपयोग प्रतिबंधित है और सांसदों को इसका पालन करना चाहिए।
केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और गिरिराज सिंह ने सौगत रॉय को सीधे टोका। उन्होंने कहा कि संसद परिसर में इस तरह की गतिविधियां लोकतंत्र के गरिमा के लिए उचित नहीं हैं। केंद्रीय मंत्रियों ने यह भी जोर दिया कि चाहे ई-सिगरेट ही क्यों न हो, इसे खुले तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर इस्तेमाल करना अनुशासनहीन माना जाएगा।
संसद परिसर में नियम और अनुशासन
संसद परिसर में धूम्रपान और तम्बाकू उत्पादों पर लंबे समय से रोक है। सांसदों को यह निर्देशित किया गया है कि वे संसद भवन और इसके आस-पास के क्षेत्रों में सिगरेट, बीड़ी या ई-सिगरेट का उपयोग न करें। सौगत रॉय की यह घटना इस दिशा में एक गंभीर नोटिस के रूप में देखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
सांसद के ई-सिगरेट पीने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। कई लोग इसे अनुशासनहीनता के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग प्रदूषण के हवाले से उनका बचाव कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे टीएमसी और बीजेपी के बीच एक नया बहस का मुद्दा भी माना जा रहा है।
राजनीतिक और कानूनी मायने
सांसदों के लिए संसद परिसर में नियमों का पालन करना अनिवार्य है। अगर किसी सांसद द्वारा नियम तोड़ा जाता है, तो उन्हें अनुशासन समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना से सांसदों की जिम्मेदारी और अनुशासन की अहमियत फिर से उजागर हुई है।
संसद परिसर में ई-सिगरेट पीने की यह घटना राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सांसदों द्वारा नियमों का पालन करना लोकतंत्र और संसद की गरिमा के लिए जरूरी है। इस मामले पर आगे भी चर्चा होने की संभावना है, और शायद संसद में अनुशासन समिति द्वारा भी समीक्षा की जा सकती है।