बिहार सरकार ने बालू, पत्थर, मिट्टी और अन्य खनिजों के अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए अपने अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य में खनिज संसाधनों की लूट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध खनन पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि अवैध खनन को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए मौजूदा संसाधनों को और मजबूत किया जाएगा। इसी क्रम में विशेष खनन पुलिस बल की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा जाएगा, ताकि संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सख्ती बढ़ाई जा सके। सिन्हा ने बताया कि कई जिलों में अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आती हैं, इसलिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना समय की मांग है।
उप मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जिले में अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और खान विभाग के अधिकारियों की है। यदि किसी क्षेत्र में अवैध खनन जारी पाया गया या कार्रवाई में लापरवाही दिखी, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना था कि “अब यह स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य के खनिज संसाधनों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।”
सिन्हा ने खनन राजस्व से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में खान एवं भूतत्व विभाग को 3500 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का लक्ष्य दिया गया था। विभाग ने इस लक्ष्य को न केवल पूरा किया बल्कि इसे पार करते हुए 3569 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया, जो विभागीय टीम की कार्यकुशलता को दर्शाता है।
चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के बारे में उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग को 3850 करोड़ रुपये के राजस्व का वार्षिक लक्ष्य दिया गया है। नवंबर 2025 तक विभाग 1530 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह कर चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष के अंत तक यह लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि राजस्व वृद्धि तभी स्थिर रह सकती है, जब खनिजों के अवैध व्यापार पर पूरी तरह रोक लगे। अवैध खनन से न केवल सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि इससे पर्यावरणीय क्षति, भूगर्भीय असंतुलन और स्थानीय स्तर पर अपराध का भी प्रसार होता है। उन्होंने बताया कि कई बार अवैध खनन का उपयोग आपराधिक गिरोह अपने आर्थिक स्रोत के रूप में करते हैं, जिन पर सख्ती जरूरी है।
उप मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने, ई-ट्रांसपोर्ट परमिट व्यवस्था को सुदृढ़ करने और खनिज परिवहन की डिजिटल निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों को और मजबूती से लागू करेगी। उनका कहना था कि तकनीक आधारित निगरानी से अवैध गतिविधियों पर नकेल कसना आसान होगा।
सिन्हा ने कहा कि सरकार की नीतियां स्पष्ट हैं—खनन से राजस्व बढ़ाना है लेकिन किसी कीमत पर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देना है। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रशासनिक सतर्कता और तकनीक के विस्तार से अवैध खनन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी और राज्य के खनिज संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।