बिहार में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद केवल मंत्रिपरिषद ही नहीं बदली, बल्कि सरकारी आवासों और प्रमुख नेताओं के आधिकारिक ठिकानों का पुनर्वितरण भी शुरू हो गया। इस प्रक्रिया का सबसे चर्चित और संवेदनशील हिस्सा रहा पूर्व मुख्यमंत्री और RJD की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी का 10 Circular Road, पटना बंगला खाली करना। करीब दो दशकों से उनके परिवार का यह निवास स्थल रहा है और अब उन्हें यह बंगला छोड़कर Hardinge Road, बंगला नंबर 39 में स्थानांतरित होना होगा।
10 Circular Road का महत्व
10 Circular Road बंगला केवल एक सरकारी आवास नहीं था। 2005 के बाद राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में यह बंगला आवंटित किया गया और उन्होंने 2006 से यहां रहना शुरू किया। यह बंगला उनके राजनीतिक करियर और पार्टी की गतिविधियों का केंद्र भी रहा। यहां कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों और रणनीति की चर्चाएं हुईं, जिससे इस बंगले का प्रतीकात्मक और भावनात्मक महत्व और बढ़ गया।
अदालत का फैसला और नियमों में बदलाव
हालांकि राबड़ी देवी इस बंगले में कई साल से रह रही थीं, लेकिन 2019 में पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। कोर्ट ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देना अनिवार्य नहीं है। यह फैसला सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और नियमों के अनुसार आवास आवंटन सुनिश्चित करने के मकसद से लिया गया। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी बंगले अब केवल वर्तमान पदधारियों या निर्धारित श्रेणी के अधिकारियों को ही आवंटित होंगे। राबड़ी देवी को अब भी बंगला इसलिए मिला हुआ था क्योंकि वह विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष थीं, जो कि इस पद के लिए निर्धारित आवास के नियम के अंतर्गत आता था।
सत्ता परिवर्तन और बंगले का पुनर्वितरण
2025 में बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ और नई सरकार ने सरकारी बंगलों का पुनर्वितरण शुरू किया। राज्य के भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को 10 Circular Road बंगला खाली करने का आदेश दिया। उनके लिए नया बंगला Hardinge Road, बंगला नंबर 39 निर्धारित किया गया। यह बंगला केंद्रीय पूल हाउस श्रेणी में आता है और विधान परिषद में विपक्ष के नेता के लिए उपयुक्त माना गया। सरकार का कहना है कि यह कदम नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया है, और इसमें किसी राजनीतिक उद्देश्य का दावा नहीं है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई। राबड़ी देवी के समर्थकों और परिवार ने इसे सत्ता परिवर्तन के प्रभाव के रूप में देखा। उनका कहना है कि 10 Circular Road बंगला सिर्फ एक घर नहीं था, बल्कि उनके परिवार और राजनीतिक इतिहास का हिस्सा था। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतीकों के पुनर्वितरण का भी हिस्सा है। सत्ता में बदलाव के साथ पुरानी पहचान और सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं।
नया बंगला — Hardinge Road, बंगला 39
राबड़ी देवी अब Hardinge Road, बंगला नंबर 39 में स्थानांतरित होंगी। यह बंगला तीन एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह बंगला विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित किया गया है और उनके पद के अनुसार उपयुक्त है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया बंगला उनकी सुरक्षा, सुविधाओं और राजनीतिक कार्यों के लिए पर्याप्त है। यह बंगला प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहतर माना जाता है और इसे उच्च अधिकारियों और मंत्रियों के लिए आवंटित किया जाता रहा है।
प्रशासनिक और राजनीतिक महत्व
राबड़ी देवी के 20 साल पुराने बंगले से हटने का फैसला यह दर्शाता है कि सत्ता परिवर्तन सिर्फ पद और सरकार बदलने तक सीमित नहीं है। इससे जुड़े प्रतीक, सुविधाएं और सरकारी संपत्तियां भी प्रभावित होती हैं। यह कदम बिहार की राजनीति में यह संदेश देता है कि प्रशासनिक नियम और कानून सब पर लागू होते हैं, चाहे व्यक्ति कितने भी राजनीतिक प्रभावशाली क्यों न हो। साथ ही यह निर्णय यह भी दिखाता है कि पुराने नियम और अदालत के फैसले लंबे समय बाद भी प्रभाव डाल सकते हैं। जिस याचिका के आधार पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए आजीवन सरकारी आवास समाप्त करने का फैसला लिया था, वही अब राबड़ी देवी के बंगले को खाली कराने में निर्णायक साबित हुई।
अंतिम टिप्पणी
राबड़ी देवी का 10 Circular Road बंगला खाली करना और Hardinge Road में नया आवास प्राप्त करना सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं है। यह बिहार की राजनीति, सत्ता परिवर्तन और सरकारी प्रतीकों के पुनर्वितरण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह दिखाता है कि सत्ता और राजनीतिक पहचान केवल पद तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि उससे जुड़ी सुविधाएं, प्रतीक और आवास भी बड़े महत्व रखते हैं। यह घटना बिहार की राजनीतिक विरासत और प्रशासनिक नियमों के बीच संतुलन की एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव के बाद राबड़ी देवी और उनका परिवार अपनी राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी की रणनीतियों को कैसे संचालित करेंगे।